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Archives for May, 2016 - Page 2

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विचारणीय :

विचारणीय :- सदा ही हम पाते हैं कि जो प्रभावशाली मनुष्य होते हैं वे होते हैं जो हमेशा प्रतिबद्धता से कार्य करते हैं ,वहीं जो प्रभावहीन होते हैं वे हमेशा शिकायत से संचालित होते हैं। –स्वामी सुखबोधनन्द।  अर्थात् यदि हम हमेशा प्रत्येक कार्य को करते हुए शिकायत करते रहेंगे,हमें हमेशा लोगों से...

स्वास्थ्य संजीवनी तुलसी :

स्वास्थ्य संजीवनी तुलसी :-   तुलसी : संस्कृत में इसे वृन्दा ,हरिप्रिया तथा अंग्रेजी में हॉली बेसिल ,बेसिल कहते हैं। यह पवित्र वनस्पति पौधा ,संतजनों ,पुरोहितों का ,राजकीय पौधा है। यह सर्वदोष निवारक औषधि ,सर्वसुलभ तथा सर्वोपयोगी है। वातावरण में पवित्रता ,प्रदूषण का शमन ,घर -परिवार में आरोग्य की...

गुरू और गुरू कृपा :-

गुरू और गुरू कृपा :- गुरू का तात्पर्य क्या है । गुरु का अर्थ है-श्रेष्ठ ,पूर्ण,आनंद एवं प्रबोध।  उपनिषदों मे कहा है –“असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मत्योर्मामृतगमय। “अथार्थ जो असत्य से सत्य की ओर ,अन्धकार  प्रकाश की ओर तथा मृतु से अमृत की ओर ले जाए ,वही गुरू है।...

अहंकार का समाप्त होना अत्यन्त आवश्यक है:

अहंकार का समाप्त होना अत्यन्त आवश्यक है:- किसी नगर के एक राजा ने वृद्ध होने पर संन्यास लेने का निर्णय लिया। उसके कोई पुत्र नहीं था ,जिसे राज सिंहासन सौंप कर वह राज कार्य से  निवृत्त हो जाता। अतः उसने मंत्रियों को बुला कर कहा ,कि कल प्रातः नगर...

लक्ष्य प्राप्ति के लिए जरूरी :- शक्ति का सही मिश्रण -जुनून,धैर्य और दृढ़ता:-

लक्ष्य प्राप्ति के  लिए जरूरी :- शक्ति का सही मिश्रण -जुनून,धैर्य और दृढ़ता: हम हमेशा अपने माता-पिता से,हमारे अध्यापकों से ,अपने उपदेशकों से सुनते आये हैं कि जीवन मे कोई उद्देश्य होना चाहिए। उद्देश्य या लक्ष्य निर्धारित करना कोई मुश्किल काम नहीं है। इसको प्राप्त करना भी गौण कार्य है। सबसे...

करने योग्य कर्म :

करने योग्य कर्म :- दूसरों को आराम दो ,स्वयं आराम मत चाहो। दूसरों को सुविधा दो ,स्वयं सुविधा मत चाहो।दूसरों को सेवा दो स्वयं सेवा मत चाहो। दूसरों को सम्मान दो ,स्वयं सम्मान मत चाहो। दूसरों की आशा भरसक पूरी करो ,दूसरों से आशा मत करो। दूसरों के अधिकारों की रक्षा करो...

वचनामृत :०

वचनामृत:०  अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिस्च यः द्वावेव सुखमेथेते दीर्घसूत्री विनश्यति।। (महाभारत शांतिपर्व) अर्थात् जो होने वाला है उसका पहले उपाय करने वाला और जो हो रहा है ,उसका उपाय उसी समय ढूंढ निकालने वाला -ये दोनों ही सुखी रहते हैं ; हर काम में देर लगाने वाले का कुछ नहीं बनता।जब...

दिव्य सन्देश :१०

दिव्य सन्देश :१० चींटी से अच्छा कोई उपदेश नहीं दे सकता ,और वह  मौन रहती है। -फ्रेंकलीन  अर्थात् जिस प्रकार चींटी मौन रह कर अपना काम करती रहती है ,परिश्रम से दिन भर अपने लिए भोजन जुटाती रहती है ,उसी प्रकार हमें भी मौन रह कर,मेहनत और ईमानदारी से अपना...

हँसिये :-

हँसिये :- अच्छे  खुशहाल जीवन के लिए जितना ज्यादा जोर से और जितना जल्दी-जल्दी हो सके उतना जल्दी हँसिये। हंसना तनाव भगाने का एक उत्तम तरीका है। हँसी द्वारा चिकित्सा की प्रक्रिया मे ,लोगों को समूह मे इकट्ठा करते  हैं और फिर वे लोग अपने आप या समूह मे ही हँसते...

माता-पिता और बच्चे :-

मात् -दिवस पर विशेष :- माता-पिता और बच्चे :- माता-पिता हमारे जीवन के मूलभूत स्रोत :- माता-पिता हमारे जीवन मे सभी वस्तुओं के स्रोत्र हैं। बच्चे उनकी  सबसे दुलारे और अनमोल सम्पत्ति हैं। माता-पिता और उनके बच्चों के बीच स्टील से भी मजबूत संबंध बहुत जरूरी हैं।  आइये जानें क्यों:- बड़े...