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Archives for June, 2016

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आप अपनी जिन्दगी को सरल बनाने के लिए क्या कर रहे हैं :

आप अपनी जिन्दगी को सरल बनाने के लिए क्या कर रहे हैं :- अपने जीवन को सरल बनाना ही सफलता ,आनंद और दीप्तिमान दिखने की कुँजी है।अपने जीवन को सरल बनाने का अर्थ ये नहीं है कि आप काम करना ही बंद कर दें।अपनी पुस्तक “अपने जीवन को सरल...

किसी के द्वारा अनिष्ट हो जाए तो उसके लिए दुखी न हों और न ही किसी के अनिष्ट की भावना ही करो:-

किसी के द्वारा अनिष्ट हो जाए तो उसके लिए दुखी न हों और न ही  किसी के अनिष्ट की भावना ही करो:- कभी –कभी किसी के द्वारा जाने –अनजाने तुम्हारा कभी कोई अनिष्ट हो जाए तो उसके लिए दुखी होने की जरूरत नहीं है। हो सकता है ये तुम्हारे...

मोक्ष प्राप्ति का उपाय :

मोक्ष प्राप्ति का उपाय :- जो न तो अत्यन्य अज्ञानी हैं और न तत्व ज्ञानी ही हैं ,वही शास्त्र को पढने अथवा सुनने का अधिकारी है।जो मोक्ष के उपाय रूप इन वैराग्यादि छह प्रकरणों का विचार (अनुशीलन) करता है वह विद्वान पुरूष फिर संसार में जन्म नहीं लेता।यह जगत...

वचनामृत: ६

वचनामृत:६ आपके जीवन में जो कुछ भी अच्छी या बुरी घटना होती है उसमें आप किसी न किसी हद तक जिम्मेदार होते हैं,इन अनुभवों से सीखने और आगे बढ़ने के लिए ,आपको हर घटना में निभाया गया आपका किरदार स्वीकार करना होगा।–ए० सी० एंडरसन अर्थात् प्रत्येक के जीवन में...

मोक्ष प्राप्ति के लिए उपासना :

मोक्ष प्राप्ति के लिए उपासना :- जगत में चौरासी लाख योनियों में मनुष्य जन्म सर्वश्रेष्ठ माना गया है। श्री आदि शंकराचार्य महाराज जी ने कहा है ,”जन्म,विद्या ,योग्यता आदि प्राप्त करके भी जो मनुष्य आत्म-मुक्ति के लिए पुरूषार्थ नहीं करता , वह असद्ग्रह से आत्महत्या करता है।“ मोक्ष ही...

हम सब अज्ञानता के अन्धकार से घिरे हैं ,ज्ञान उसी में आच्छादित हो जाता है :

हम सब अज्ञानता के अन्धकार से घिरे हैं ,ज्ञान उसी में आच्छादित हो जाता है:- एक राजा था ,वह वेद शास्त्रों  का सुनने वाला था। अपना सुन्दर आदर्श रखता था। उसने एक पंडित जी वेद शास्त्रों को सुनाने के लिए रखे। तब बहुत दिन बाद एक दिन राजा ने...

पहले स्वयं को बदलें ,फिर अन्य को :

पहले स्वयं को बदलें ,फिर अन्य को:- एक दिन एक धनाढ्य व्यक्ति का लड़का कड़कती धुप में चलकर आ रहा था कि धुप से तपती जमीन ने उसके पैरों को जला डाला। घर आकर उसके मन में एक विचार उठा और वह तुरंत ही  अपने पिता के पास उपस्थित...

स्वयं के दोष,पाप देखें अन्यों के नहीं :

स्वयं के दोष,पाप देखें अन्यों के नहीं :- कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति पर मिथ्या ही दोषारोपण कर दिया जाता है और वो इस हद तक मजबूर हो जाता है कि अपने आप को निर्दोष भी नहीं सिद्ध कर सकता या कभी-कभी परिस्थितियाँ ऐसी बन जाती हैं...

संतुष्ट एवम् खुश रहे :

संतुष्ट एवम् खुश रहें:- खुशी और मस्ती के लिए जीवन कम उम्मीदोंके साथ जीयें ,कभी न भूलें कि हम संसार से खाली हाथ ही जायेंगे इसलिए उस संतोष को जो बुद्धिमानों का गुण है और नकल के लायक है ,उसे अपनाएं और संतुष्ट रहे। हमारी  एक अच्छी व्यावसायिक और...

वचनामृत: ५

वचनामृत:५ जब आप एक मुश्किल स्थिति में हों और सब कुछ आप के खिलाफ़ जा रहा हो,उस वक्त जब ऐसा लग रहा हो कि आप और बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे,कभी भी हथियार न डालें क्योंकि यही वो वक्त और समय होगा जब कि ज्वार आएगा अर्थात् आप के जीवन...