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Archives for June, 2016 - Page 2

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गुस्सा होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है ,पर ऐसा करना क्या सही है ?

गुस्सा होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है ,पर ऐसा करना क्या सही है ? जीवन में किसी न किसी समय हम सभी गुस्सा होते हैं। जब हम पाते हैं कि चीजें हमारी आशाओं और इच्छाओं के अनुकूल नहीं चल रहीं तब हम गुस्सा और हताश होने लगते हैं। जब कभी...

बदलाव जीवन का आधारभूत अचल कारक है जो हमारे जीवन में नित्य होता रहता है :

बदलाव जीवन का आधारभूत अचल कारक है जो हमारे जीवन में नित्य होता रहता है :- बदलाव हमारे जीवन के पन्नों में एक अवांछित अतिथि की तरह है जो हमें कठोर,बेआराम कर देता है और हमारे चारों और खो देने का डर पैदा कर देता है। ऐसा शायद इसलिए है कि...

भगवान को कैसे व्यक्ति प्रिय होते हैं :

भगवान को कैसे व्यक्ति प्रिय होते हैं :- भगवान् को  ऐसे व्यक्ति प्रिय जिनका किसी भी प्राणी के साथ द्वेष नहीं होता।उन्हें ऐसे व्यक्ति जिनकी सम्पूर्ण प्राणियों के साथ मित्रता (प्रेम) और सब पर करुणा (दयालुता) रहती है,प्रिय होते हैं ।उन्हें ऐसे व्यक्ति जो अहंता और ममता से रहित ,क्षमाशील तथा...

आज का सुविचार : जीवन की गाडी

आज का सुविचार-जीवन की गाडी:- दोस्तों जीवन की गाडी चार पहियों पर चलती है। एक पहिया पति, एक पत्नी ,एक घर के बुजुर्ग और एक पहिया बच्चे होते हैं। रिश्ते उस गाडी का इंजन और प्यार,मोहब्बत और विश्वास उस का ईंधन होते हैं।परिवार उस गाडी का ढांचा होता है।...

कभी न भूलें यदि सर्दी आएगी तो क्या बसंत ज्यादा पीछे रहेगा ?

कभी न भूलें यदि सर्दी आएगी तो क्या बसंत ज्यादा पीछे रहेगा ? कभी-कभी जीवन खाली-खाली सा लगता है। ऐसा हरेक के साथ जीवन के किसी न किसी पल में होता है। कोई अपने आप को ख़ुशी से वंचित महसूस करता है और अस्तित्ववादी बन जाता है। आगे बढ़ने की...

हम अपने भाग्य का निर्माण अपने विचारों और चाल-चलन से कर सकते हैं .

हम अपने भाग्य का निर्माण अपने विचारों और चाल-चलन से कर सकते हैं:- आप ने महसूस किया होगा कि जब आप सकारात्मक सोचते हैं तो आप ज्यादा उर्जावान और तनावरहित महसूस करने लगते हैं। हमारे सोचने का तरीका (हमारा रवैया और जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण ),हमारी भौतिक अवस्था...

भगवान् भक्ति का अधिकारी कौन :

भगवान् भक्ति का अधिकारी कौन :- दैवी संपत्ति(भगवान् भक्ति के अधिकारी) वाले मनुष्य: परमात्मा को देव भी कहते हैं  और उस परमात्मा के जो गुण होते हैं वे “दैवी संपत्ति” कहलाते हैं अर्थात् जो साधन परमात्मा की प्राप्ति में निमित्त बनते हैं ,वे दैवी संपत्ति कहलाते हैं।इस प्रकार के...

जीवन का सच्चा आनंद

जीवन का सच्चा आनंद:- जीवन का सच्चा आनंद तो आत्म-ज्ञान में ही है ,जिसके द्वारा मनुष्य के हृदय में सद्विचार उदय होते हैं।: संसार के भौतिक ज्ञान को उपनिषद्कारों ने “अविद्या ” कहा है ,जिसे विज्ञान कहते हैं। क्योंकि आज के इस विज्ञान के द्वारा केवल भौतिक जगत की वस्तुओं...

आप अपनी प्रतिष्ठा और धन अपने साथ नहीं ले जा सकते :

आप अपनी  प्रतिष्ठा और धन अपने साथ नहीं ले जा सकते :- कैसे हम अपनी जवानी से बूढ़ापे में प्रवेश कर जाते हैं हम जान नहीं पाते। जवानी जीवन का सपना है…. जीवन का भ्रम है। कुछ सपने पूरे हो जाते हैं कुछ बदल जाते हैं और कुछ भुला दिए...

नारी शक्ति :

नारी शक्ति :- नारी सृष्टि की सर्वोत्तम कृति है।नारी हृदय में विद्यमान वात्सल्य ,स्नेह और ममत्व की भावनाएं ही इस संसार को पोषित कर रही हैं।माता का हृदय एक स्नेहपूर्ण झरना है जो सृष्टि के आदि से अविरल झरता हुआ मानवता का सिंचन कर रहा है।संसार में जितने भी...