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Archives for June, 2016 - Page 3

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जीवन में सफल होने के लिए अपनी असफलताओं को गले लगाएँ :

जीवन में सफल होने के लिए अपनी असफलताओं को गले लगाएँ :- असफलता क्या है ?एक पुरानी कहावत है कि असफलता ,सफलता प्राप्त करने के खंभे हैं। केवल वही मनुष्य जो जीवन में कुछ न कुछ करने की कोशिश करता रहता है ,सफलता का स्वाद चखता है ,चाहे इस...

लक्ष्मी कृपा :

लक्ष्मी कृपा :- आज का युग भौतिक युग है। प्रत्येक व्यक्ति भौतिक सुखों के लिए अर्थ चाहता है और उसके पीछे दौड़ता है। धन प्राप्ति के लिए करने तथा न करने योग्य कर्म करता है। उसका बस एक ही लक्ष्य रहता है येन केन प्रकरेण धन प्राप्ति और धन...

वचनामृत:४

वचनामृत:४ बुद्धिमत्ता का सच्चा लक्षण ज्ञान नहीं बल्कि कल्पना–शक्ति है।– अल्बर्ट आइंस्टीन अर्थात् जब हम ज्ञान प्राप्त करते हैं तब हम बुद्धिमान बनते हैं लेकिन जिस प्रकार ठहरा हुआ पानी सड जाता है और उस में काई जम जाती है उसी प्रकार जब हम अपनी बुद्धिमानी का उपयोग कुछ...

बंधे हुए हाथी ;-

बंधे हुए हाथी :- एक व्यक्ति कहीं से गुजर रहा था ,तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा और अचानक रुक गया। उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है। उसे इस बात पर अचरज हुआ कि हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे...

वचनामृत:३

वचनामृत:३  रत्न किसी को ढूंढता नहीं फिरता।उसी को लोग ढूंढते हैं। –विविध अर्थात् जिस प्रकार गुलाब की खुशबू या कस्तूरी मृग की खुशबू सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है और लोग उस खुशबू की तलाश में फिरते रहते हैं उसी प्रकार रत्न अर्थात् ऐसा व्यक्ति जो मनुष्यों में श्रेष्ठ...

धैर्य

धैर्य :- धैर्य के अनगिनत गुण हैं ।  जो इन्तजार कर सकते हैं वो जीत सकते हैं। वो केवल जीत ही नहीं सकते बल्कि बड़ी जीत जीत  सकते हैं। मनुष्य के तौर पर हम तुरंत फ़ल पाना  चाहते हैं। चाहे ये छोटे ही हों पर हम इन इनामों की  तरफ आकर्षित होते हैं। उदाहरण...

ज्ञान की भूमिका : ज्ञान का माहात्म्य

ज्ञान की भूमिका :- ज्ञान का माहात्म्य    सत्पुरूषों के साथ शास्त्र चिंतन करने से जिसका देहाभिमान नष्ट हो गया है ,उसे तत्त्व का ज्ञान हो जाने से सर्व-व्यापक आत्मा का स्वरुप विदित हो जाता है। वह शुद्ध +बुद्धि द्वारा +परब्रह्म का साक्षात्कार कर लेता है।जिसे मोह का विनाश हो जाता...

वैराग्य से मोक्ष प्राप्ति:-

वैराग्य से मोक्ष प्राप्ति:- वेदों के अनुसार :- मनेव् मनुष्यानां कारणं बन्धमोक्षयो:‍।  ‍   अर्थात्  मन ही मनुष्यों के बंधन और मोक्ष का हेतु है। शुद्ध मन जिसमें संसार की किसी भी वस्तु से राग नहीं है और संसार में फिर न आने की पक्की धारणा बन चुकी है...