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Archives for July, 2016 - Page 2

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जीवन में दो का महत्व:

जीवन में दो का महत्व :- दो पुरूष इस लोक में शोभा पाते हैं – १]वह जो अमृत समान वचन बोले और २]वह जो साधु संतों की पूजा करे। अर्थात्  जब हम मीठे वचन बोलते हैं,हितकारी वचन बोलते हैं तो वो हर किसी को अच्छे लगते हैं।जब हम साधु संतों...

शिष्य बनो :

शिष्य बनो  :- शिष्य का सामान्य अर्थ होता है –सीखने वाला। गुरू शिष्य की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है।स्वयं भगवान् राम व कृष्ण ने भी गुरुगृह जाकर शिष्य के रूप में शिक्षा ग्रहण की।स्वामी विवेकानंद ,स्वामी दयानंद सरस्वती ,छत्रपति शिवाजी ,संत कबीर आदि महापुरूषों ने...
लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय :१

लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय :१

लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय :१ लक्ष्मी का तात्पर्य है –समृद्धि एवं सम्पन्नता।लक्ष्मी ‘श्री ‘रूपा हैं जो वात्सल्यमयी हैं ,धन-धान्य,संतान देने वाली हैं ,जो मन और वाणी को दीप्त करती हैं ,जिसके आने से दानशीलता प्राप्त होती है ,जो वनस्पति और वृक्षों में स्थित हैं ,जो कुबेर ,इंद्र ,और अग्नि...

जीवन में सम्पूर्ण सुख ,शान्ति व सच्चे आनंद की प्राप्ति करने का लक्ष्य होना चाहिए

जीवन में सम्पूर्ण सुख ,शान्ति व सच्चे आनंद की प्राप्ति करने का लक्ष्य होना चाहिए:- जीवन में सम्पूर्ण सुख ,शान्ति व सच्चे आनंद की प्राप्ति करने का लक्ष्य होना चाहिए।और इसके लिए मनुष्य को अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाने की तथा अपने मनोबल को बढाने की आवश्यकता है क्योंकि...

वचनामृत:९

वचनामृत:९ ज्ञान के लिए किया जाने वाला कर्म सभी कर्मों से श्रेष्ठ है । -इन्ताज अली अर्थात् जब हमें ज्ञान मिलेगा तभी हम सबसे श्रेष्ठ कहलायेंगे क्योंकि तब ही हम अच्छे बुरे की ,अपने पराये की पहचान कर पायेंगे और उन्नति की राह पर चल सकेंगे इसलिए ज्ञान प्राप्ति...

वचनामृत :८

वचनामृत :८ आचाराल्लभते ह्यायुराचारादीप्सिता: प्रजाः।आचाराद्धनमक्षय्यमाचारो हन्त्यलक्षणम्।। (मनुस्मृति ४ ।१५६ ) अर्थात्  ‘मनुष्य आचार से आयु को प्राप्त करता है ,आचार से अभिलषित संतान को प्राप्त करता है ,आचार से अक्षय धन को प्राप्त करता है और आचार से अनिष्ट लक्षण को नष्ट कर देता है ।‘यदि हम अच्छे विचार...

भौतिकता एवं सुख:

भौतिकता एवं सुख:- वे सभी तत्त्व जो दिखाई पड़ने वाले हैं ,स्पर्श करने योग्य हैं ,दैनिक जीवन में प्रयोग में लाये जा सकते हैं पदार्थ अथवा द्रव्य कहे जाते हैं और भू से सम्बंधित होने के नाते भौतिक कहे जाते हैं।मनुष्य का शरीर भी भौतिक कहा जाता है क्योंकि...

वचनामृत :७

वचनामृत :७ केवल आनंद ही कल्याणकारी वस्तु है।आनन्दित होने का स्थान यहीं है।आनंदित होने का समय अभी है।आनंदित होने का उपाय दूसरों के आनंद में सहायक होना है।–इंगर सोल अर्थात् जिसका मन आनंद से भरा होता है वो हर किसी के लिए केवल अच्छा ही सोचता है।जब हम दूसरों...

कभी भी अपने भूतकाल को अपने वर्तमान पर हावी न होने दें ,हमेशा जीवन में सकारात्मक रवैया रखें ,छोटी –छोटी बातों में खुशियाँ खोजें ,प्रबुद्ध रहना जीवन में सफलता कि कुंजी है , प्रबुद्ध रहें ,सफल रहें खुश रहें और जीवन का शुक्रिया अदा करें।:-

कभी भी अपने भूतकाल को अपने वर्तमान पर हावी न होने दें ,हमेशा जीवन में सकारात्मक रवैया रखें ,छोटी –छोटी बातों में खुशियाँ खोजें ,प्रबुद्ध रहना जीवन में सफलता कि कुंजी है , प्रबुद्ध रहें ,सफल रहें खुश रहें और जीवन का शुक्रिया अदा करें।:- हर रोज जिन्दगी हमें...

कल्याण कैसे :

कल्याण कैसे :- भगवान् सभी को उनकी जरूरत के हिसाब से देता है।हमें कुछ और प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है।चूँकि जितना हमें मिला है,वो हमारी जरूरत के मुताबिक़ है अतैव और अधिक वस्तु की हमें जरूरत नहीं है। जितना हम जानते हैं उतना ही काफी है,और अधिक जानने...