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Archives for October, 2016

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विचारणीय:१५

विचारणीय:१५ जीवन का रहस्य ईमानदारी और निष्पक्ष व्यवहार है।यदि आप इसकी नक़ल कर सकते हो तो आपका जीवन बन जाता है।-ग्रोउचो मार्क्स अर्थात् हमें ईमानदारी से जीवन बिताना चाहिए।यदि हम ईमानदारी से जीवन बिताएंगे और अपने आस-पास के व्यक्तियों और घटनाओं के बारे में निष्पक्ष विचार रखेंगे तो हमें...

एकाग्रता के लाभ :-

एकाग्रता के लाभ :- उन दिनों स्वामी विवेकानंद देश भ्रमण में लगे हुए थे।साथ में उनके एक गुरू भाई भी थे।स्वाध्याय,सत्संग,एवं कठोर तप का अविराम सिलसिला चल रहा था।जहाँ कहीं अच्छे ग्रन्थ मिलते,वे उनको पढना नहीं भूलते थे।किसी नयी जगह जाने पर उनकी सबसे पहली तलाश किसी अच्छे पुस्तकालय...

समय की कीमत:-

समय की कीमत:- समय बहुत ही बलवान है।यह निरंतर ही चलता रहता है।कब समय चला जाता है पता ही नहीं चलता।हम रुपयों को तो तिजोरी में बंद करके रख सकते हैं,पर समय को बंद करके नहीं रख सकते।इसलिए हमें हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए।कोई भी क्षण व्यर्थ नही जाने देना...

विचारणीय:१४

विचारणीय:१४ सदैव प्रसन्न रहो।इससे मस्तिष्क में अच्छे विचार आते हैं और चित्त शुभ कामों की ओर लगा रहता है।-टैगोर अर्थात् जब हम प्रसन्न रहते हैं तो हमें किसी से भी कोई शिकायत नहीं होती।जब कोई शिकायत नहीं होती तो किसी के भी प्रति दुर्भावना उत्पन्न नहीं होती।दुर्भावना से ही...

वेश-भूषा से किसी को न आंकें:-

वेश-भूषा से किसी को न आंकें:- एक समय की बात है।एक जिज्ञासु छोटा चूहा था।उसने घर छोड दिया और देश भर में इधर-उधर भटकने लगा।एक दिन वह एक खेत में पहुँचा।वहाँ उस के सामने दो नारंगी रंग के जानवर थे।ऐसे जानवर उसने पहले कभी नहीं देखे थे। एक बड़ा...

सच्चा साधु कौन?:-

सच्चा साधु कौन?:- एक दिन भगवान् बुद्ध ने सोचा अपने शिष्यों को दीक्षा देने के बाद उनकी परीक्षा ली जाए।उन्होंने शिष्यों से कहा,”तुम सभी जहाँ कहीं भी जाओगे वहाँ तुम्हें अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के लोग मिलेंगे।अच्छे लोग तुम्हारी बातों को गौर से सुनेंगे और तुम्हारी सहायता करेंगे।लेकिन...

विचारणीय:१३

विचारणीय:१३ परिस्थितियों को यों ही छोड दिया जाए तो वे ठीक नहीं हो जातीं।-हक्सले अर्थात् हमें सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड कर नहीं बैठ जाना चाहिए।खेत में भी फसल तब तक नहीं उगती जब तक कि उसमें हल न चलाया जाए,बीज न बोया जाए,समय-समय पर पानी और खाद...

ज़रा सोचिये:१

ज़रा सोचिये:१ मित्रों अभी कुछ समय पहले का वाकया है।रात का १२ बजे के करीब का समय था।अधिकाँश लोग सो चुके थे।हम भी सोने की तैयारी कर रहे थे।तभी पड़ोस के फ्लैट से जोर-जोर की आवाजें आने लगीं।सोचा पता नहीं क्या हो गया है।जरा स्थिति का पता लगाने की...

अखंडता(ईमानदारी और सत्यनिष्ठा)–गलत को सही कर देती है :-

अखंडता(ईमानदारी और सत्यनिष्ठा)–गलत को सही कर देती है :- अखंडता(ईमानदारी और सत्यनिष्ठा) का अर्थ है उस वक्त भी सही बात करना जब कोई देख न रहा हो।क्या कोई वादा तोड़ना या अपने वचन का पालन न करना गलत है ?आप क्या हैं,कायर या ईमानदार यदि आप अपनी प्रतिबद्धता से...

विचारणीय:१२

विचारणीय:१२ जो मूर्ख अपनी मूर्खता को जानता है,वह धीरे-धीरे सीख सकता है;पर जो मूर्ख अपने को बुद्धिमान समझता है,उसका रोग असाध्य है।–अरस्तु अर्थात् यदि हम अपने को बुद्धिमान समझते रहेंगे तो नयी बातों को सीखने से कतराने लगेंगे।हम ये सोचेंगे कि हमें तो सब कुछ आता है और इस...
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