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Archives for October, 2016 - Page 2

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तीव्र इच्छा:-

तीव्र इच्छा:- व्यक्ति के जीवन में अनेक समस्याएँ आती रहती हैं।ये समस्याएँ आर्थिक,सामाजिक,राजनैतिक या मनोवैज्ञानिक कैसी भी हो सकती हैं।पर जब तक व्यक्ति का किसी काम को न करने से काम चल रहा होता है या उसके स्थान पर किसी दूसरे सरल विकल्प के द्वारा संतोष प्राप्त होने की...

विचारणीय:११

विचारणीय:११ चापलूस इसलिए आपकी चापलूसी करता है क्योंकि वह आपको अयोग्य समझता है,लेकिन आप उसके मुँह से अपनी प्रशंसा सुनकर फूले नहीं समाते।-टॉलस्टॉय अर्थात् जब कोई हमारी तारीफ़ कर रहा होता है और हमारी हाँ में हाँ मिला रहा होता है तो इसका अर्थ ये कदापि नहीं है कि...

बहुत बड़ी सीख:-

बहुत बड़ी सीख:- किसी गाँव में एक जमींदार रहता था।एक दिन सोते हुए उसने स्वप्न देखा।उसने देखा कि उसने अपनी बहुत सारी जमीन पर धान की फसल रोप दी।उसकी रखवाली के लिए उसने चारों ओर मचान बनाकर अनेक नौकर तैनात कर दिए।वे रात दिन रखवाली करते लेकिन फिर भी...

विचारणीय:१०

विचारणीय:१० ईर्ष्या चारों ओर से दूसरों की कीर्ति के प्रकाशमंडल से घिरी रहती है,जिसके भीतर यह बिच्छू की तरह,जो ज्वाला से घिर गया हो,अपने को आप ही डंक मारती हुई मर मिटती है।-लुकमान अर्थात् जब हम ईर्ष्या करते हैं तो जिस से ईर्ष्या करते हैं उस के बारे में,उस...

आत्म विकास के लिए:-

आत्म विकास के लिए:- अपने आप का सबसे अच्छा संस्करण होने से स्वयं को न रोकें: जब हम इस बात की बहुत ज्यादा परवाह करने लग जाते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे तो हम हमारी सबसे बड़ी सीमाएं निर्धारित कर लेते हैं।प्रत्येक स्वप्न,आकांक्षा,महत्वाकांक्षा और लक्ष्य इस...

आप अगले सबसे अच्छे वक्ता हो सकते हैं:-

आप अगले सबसे अच्छे वक्ता हो सकते हैं:- क्या आपने कभी मार्टिन लूथर किंग,बराक ओबामा या अब्राहम लिंकन के बारे में सुना है?इन्होने अपने शब्दों से लोगों को प्रभावित किया है।आप भी ऐसा कर सकते हैं।पर इसके लिए सार्वजनिक भाषण कौशल की जरूरत है। बहुत सारे लोगों के सामने...

धन का दिखावा कभी नहीं करना चाहिए:-

धन का दिखावा कभी नहीं करना चाहिए:- गिरीशचंद्र घोष बांग्ला के प्रसिद्ध कवि-नाटककार थे।उनके एक धनी मित्र थे।वह अपनी रईसी अपने व्यवहार में भी दिखाते थे।कहीं जाते तो उनका नौकर उनके लिए चांदी के बर्तन साथ ले कर चलता,ताकि वह अपना खाना उसी में खाएं।घोष जी को यह बात...

मृत्यु का स्वागत हँसते-हँसते करो:-

मृत्यु का स्वागत हँसते-हँसते करो:- मृत्यु का पर्याय है-‘नाश’,जो संस्कृत के ‘नश अदर्शने ‘ धातु व्युत्पन्न है,जिसका अर्थ है -देखने योग्य न रह जाना।जिसमें जीवात्मा अपने पूर्व स्थूल शरीर को त्याग कर दूसरे शरीर को इस प्रकार धारण करता है,जैसे कोई मनुष्य फटे -पुराने वस्त्रों को उतार कर नवीन...
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