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Archives for November, 2016

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एक विशेष बंधन-माँ :-

एक विशेष बंधन-माँ :- एक समय की बात है,सरहद पर एक माँ अपने शिशु के साथ रहती थी।उस छोटे लड़के के पिता,जो की सेना में एक सार्जेंट थे,कुछ समय पहले एक युद्ध में शहीद हो गए थे। एक शाम,माँ को किसी जरूरी काम से घर से बाहर जाना था,इसलिए...

विचारणीय:२१

विचारणीय:२१ वही सबसे धनवान है जो सबसे कम पर संतोष कर सकता है,क्योंकि संतोष ही सच्चा धन है।-सुकरात अर्थात् अक्सर लोग निन्यानवे के चक्कर में पड़े रहते हैं।जितना भी वे कमा लें या संचित कर लें उनको कम ही लगता है।इस प्रकार वे सदा अपने को गरीब ही मानते...

अशांति का मूल कारण और उसका निवारण:-

अशांति का मूल कारण और उसका निवारण:- आज का आधुनिक समाज विभिन्न प्रकार के दुखों से घिरा हुआ है।यहाँ तक कि हमारी पूरी जिन्दगी भी इन दुखों को सुनने के लिए कम पड़ जाती है।अलग-अलग धर्म और धर्मगुरु हमें इन दुखों से,इस अशांति से निबटने के विभिन्न उपाय बताते...

विचारणीय:२०

विचारणीय:२० चित्त की प्रसन्नता ही व्यवहार में उदारता बन जाती है।-प्रेमचंद अर्थात् जब हम प्रसन्न रहते हैं तभी अच्छा-अच्छा सोच पाते हैं और हमारा व्यवहार भी अन्यों के प्रति उदार हो जाता है।यदि हम चिडचिडे रहेंगे तो हमेशा लड़ाई के मूड में रहेंगे और लोगों की भलाई करने के...

विचारणीय:१९

विचारणीय:१९ सबसे शानदार विजय है अपने पर विजय प्राप्त करना और सबसे ज़लील और शर्मनाक बात है अपने से परास्त हो जाना।-अफ़लातून अर्थात् अपने पर विजय प्राप्त करने का अर्थ है अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करना और अपने से परास्त हो जाने का अर्थ है अपनी इन्द्रियों के...

विचारणीय:१८

विचारणीय:१८ जो बदले का ध्यान रखता है,वह अपने ही घावों को हरा रखता है।-बेकन अर्थात् जब हमारा कोई अहित करता है तो स्वभावतः हमारे मन में उस के लिए कटुता हो जाती है और हम प्रतिक्षण उस व्यक्ति से बदला लेने की सोचते रहते हैं।यहाँ तक कि जिस व्यक्ति...

पतन का कारण:-

पतन का कारण:- एक जिज्ञासु शिष्य ने गुरू से पुछा,सभी मनुष्यों की बनावट एक जैसी है,फिर उनमें से कुछ पतन के गर्त में गिर कर क्यों डूब जाते हैं? गुरू जी ने उसे दुसरे दिन एक तालाब के किनारे बुलाया।कहा,तुम्हारे सवाल का जवाब वहीँ मिलेगा।ठीक समय पर दोनों तालाब...

विचारणीय:१७

विचारणीय:१७ लोगों में बल की नहीं संकल्प-शक्ति की कमी होती है।-विक्टर ह्यूगो अर्थात् अक्सर देखा गया है,लोग धन संपत्ति से युक्त होते हैं।साथ ही साथ उन के अन्दर किसी भी काम को करने की शक्ति होती है फिर भी वे कोई कार्य सफलतापूर्वक नहीं कर पाते।ऐसा इसलिए होता है...

अपने बच्चों के बारे में स्वप्न न देखें ,अपने बच्चों के साथ स्वप्न देखें:-

अपने बच्चों के बारे में स्वप्न न देखें ,अपने बच्चों के साथ स्वप्न देखें:- अचानक जब हम देखते हैं कि हमारे बच्चे ११वीं कक्षा या १२ वीं कक्षा में पहुँच गए हैं तो हमारी चिता का स्तर एकदम से बढ़ जाता है।हम सोचने लगते हैं कि अब समय है...

आलोचनात्मक रूप से सकारात्मक बनें,सकारात्मक सोचें और आशावादी बनें:-

आलोचनात्मक रूप से सकारात्मक बनें,सकारात्मक सोचें और आशावादी बनें:- आलोचना को सही भाव से लेना किसी को भी जीवन में आगे बढ़ने में मदद करता है।वो व्यक्ति,जो ये जानता है कि आलोचना से किस तरह से निबटना है,ये भी जानता है कि जीवन और मृत्यु से कैसे निबटना है।आलोचना...
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