ACT POSITIVE NOW

Archives for February, 2017

You are here: » »
जीवन कैसे जीयें:६

जीवन कैसे जीयें:६

जीवन कैसे जीयें:६ ध्यान करें:- ध्यान जीवन में सकारात्मकता,शान्ति,ख़ुशी लाता है और जीवन के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर होता है।हम में से अधिकाँश के लिए ध्यान लगाने का अर्थ है किसी मन्त्र विशेष पर,किसी चिन्ह पर अथवा नाम या तस्वीर पर ध्यान लगाना।जैसे ही हम ध्यान लगाने और केन्द्रित...
विचारणीय:३८

विचारणीय:३८

विचारणीय:३८ सेवा हृदय और आत्मा को पवित्र करती है।सेवा से ज्ञान प्राप्त होता है,और यही जीवन का लक्ष्य है।-स्वामी शिवानन्द अर्थात् जब व्यक्ति पर सेवा में लग जाता है तो उसके मन में सद्गुणों का संचार होने लगता है क्योंकि उसके मन से द्वेष,ईर्ष्या,क्रोध आदि की भावना समाप्त होने...
जीवन कैसे जीयें:५

जीवन कैसे जीयें:५

जीवन कैसे जीयें:५ जीवन में धीमी गति से बढ़ें क्योंकि ऐसा करना सकारात्मकता लाता है:- जिन्दगी का चाहे जो भी लक्ष्य हो,हमें सफल होने के लिए एक सकारात्मक अनुभूति की आवश्यकता होती है।ऐसा केवल तभी संभव है जब हम भलाई की भावना को पाने का रहस्य जान जाते हैं।हालांकि...
विचारणीय:३७

विचारणीय:३७

विचारणीय:३७ नम्रता पत्थर को भी मोम कर देती है।-प्रेमचंद अर्थात् कोई यदि हम पर क्रोध कर रहा हो या हमसे नाराज हो तब हमें शांत और विनम्र रहना चाहिए क्योंकि यदि हम ऐसा करेंगे तो न केवल सामने वाले का क्रोध शांत हो जाएगा अपितु उसकी नाराजगी भी ख़त्म...
विचारणीय:३६

विचारणीय:३६

विचारणीय:३६ पाप में पड़नेवाला मानव होता है,जो पाप पर पछताता है वह सज्जन है,जो पाप पर गर्व करता है वह शैतान है।-थॉमस फुलर अर्थात् मनुष्य के भीतर सज्जनता और दुर्जनता दोनों तरह के ही गुण होते हैं.हम क्या चुनते हैं ये हम पर ही निर्भर करता है।कभी-कभी हम स्वभाववश...
जीवन कैसे जीयें:४

जीवन कैसे जीयें:४

जीवन कैसे जीयें:४ जीवन के प्रत्येक क्षण का अनुभव करें,उसे उत्सव की तरह मनाएँ और सम्पूर्णता से जीयें:- त्यौहार न केवल हमारे आध्यात्मिक विकास के लिए अच्छे होते हैं अपितु ये हमारी जीवन यात्रा को एक उद्देश्य और अर्थ भी प्रदान करते हैं।उत्सव एक माध्यम हैं जो हम में...
विचारणीय:३५

विचारणीय:३५

विचारणीय:३५ भलाई जितनी अधिक की जाती है,उतनी ही अधिक फैलती है।-मिल्टन अर्थात्  समाज में भलाई से अच्छा कुछ नहीं है।जब हम किसी की भलाई करते हैं तो उसके मन में भी करुणा और अच्छे भावों का संचार होने लगता है।जिस प्रकार पुष्प की खुशबू हर ओर फ़ैल जाती है...
जीवन कैसे जीयें:३

जीवन कैसे जीयें:३

जीवन कैसे जीयें:३ खुशियों भरा छोटा जीवन भी एक बड़े और स्वार्थी जीवन से बेहतर है।:- बलूत का पेड़ लम्बे समय तक जीता है और बहुत मजबूत होता है।वह बुरे से बुरे तूफानों और बाढ़ों को भी झेल सकता है।पर वह अपनी पुरानी पत्तियों को आसानी से जाने नहीं...
विचारणीय:३४

विचारणीय:३४

विचारणीय:३४ मन ही मनुष्य को स्वर्ग या नरक में बिठा देता है।स्वर्ग या नरक में जाने की कुँजी भगवान् ने हमारे हाथ में दे रखी है।-स्वामी शिवानन्द अर्थात् हमारे मन में अच्छी और बुरी दोनों तरह को भावनाएँ होती हैं।हम इसमें से क्या चुनते हैं ये हमारे विवेक पर...
जीवन कैसे जीयें:२

जीवन कैसे जीयें:२

जीवन कैसे जीयें:२ जीवन की छोटी-छोटी बातों में ख़ुशी खोजें:- ये कहावत है कि हमारे जीवन की अनेकों समस्याएँ केवल सादा और सरल जीवन जीने से ही हल हो जाती हैं।इसका ये अर्थ कदापि नहीं है कि हम अपनी भौतिक जरूरतों को पूर्ण रूप से त्याग दें और तपस्वियों...