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CONTEMPLATIVE-HAPPINESS

CONTEMPLATIVE-HAPPINESS

CONTEMPLATIVE-HAPPINESS विचारणीय: ख़ुशी (प्रसन्नता): भार हल्का हो जाता है ,यदि प्रसन्नतापूर्वक उठाया जाए-ओविड अर्थात् यदि कोई भी काम प्रसन्नता पूर्वक किया जाए तो न केवल उस काम को करने में आनंद आएगा ,बल्कि शांत दिमाग से किये जाने के कारण ,वही कार्य हमें सुगम लगने लगेगा.भारी से भारी काम...
HOW TO LIVE LIFE: BE COMPASSIONATE:4

HOW TO LIVE LIFE: BE COMPASSIONATE:4

HOW TO LIVE LIFE: BE COMPASSIONATE:4 जीवन कैसे जीयें:दया और प्रेम:४ जब तक हम संवेदनशील नहीं होंगे तब तक न तो हम मनुष्य हैं और न ही दयालू क्योंकि सर्वप्रथम और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता जो मानव जाति के लिए आवश्यक है ,वो है संवेदनशील होना ,करुणामय होना. संवेदनशीलता एक...
COTEMPLATIVE 62 – TO CONQUER OUR DESIRES

COTEMPLATIVE 62 – TO CONQUER OUR DESIRES

COTEMPLATIVE 62 – TO CONQUER OUR DESIRES विचारणीय:62 – इच्छाएं/ इच्छाओं पर विजय सभी इच्छाएं मन में ही उत्पन्न होती हैं,इसलिए श्रेष्ठ पुरूष वे हैं जो मन पर काबू पा लेते हैं।-एतरेय आरण्यक अर्थात्  हमारा मन ही है जो नित्य चलायमान रहता है।तरह–तरह की इच्छाएं करता है और उन...
CONTEMPLATIVE: FRIENDS

CONTEMPLATIVE: FRIENDS

CONTEMPLATIVE: FRIENDS हमारा कोई सच्चा मित्र न हो तो जगत निर्जन वन के समान होगा।-बेकन अर्थात् जीवन में सच्चे मित्रों की परम आवश्यकता होती है।सच्चा मित्र हमारा साथ कभी नहीं छोड़ता।वह हमारी प्रत्येक कठिनाइयों में हमारे साथ खड़ा रहता है।यदि कोई सच्चा मित्र न हो तो हम संसार में...
CONTEMPLATIVE-KNOWLEDGE

CONTEMPLATIVE-KNOWLEDGE

CONTEMPLATIVE-KNOWLEDGE Knowledge is like Kamdhenu cow–Chanakya VIZ  The way Kamadhenu cow fulfills all our wishes, in the same way, by means of knowledge one can attain whatever the person wants .A person, with the help of the strength of knowledge ,can easily face bigger problems and  can attain the...
मन की सोच: प्रेम या अपनत्व क्या है ?

मन की सोच: प्रेम या अपनत्व क्या है ?

मन की सोच: प्रेम या अपनत्व क्या है ? अपनों के लिए स्वभावत: उनके दोषों को छिपाने और गुणों को प्रकट करने की आदत होती है। कोई भी पिता अपने प्यारे पुत्र के दोषों को नहीं प्रकट करता है। वह तो उसकी प्रशंसा के पुल ही बाँधता रहता है।...