ACT POSITIVE NOW

Archives for spiritual - Page 28

You are here: » ( » Page 28)

सर्वोच्च सफलता प्राप्त करने के लिए अच्छे शत्रुओं की आवश्यकता होती है:-

सर्वोच्च सफलता प्राप्त करने के लिए अच्छे शत्रुओं की आवश्यकता होती है:- चाणक्य कहते हैं,”सफल होने के लिए अच्छे मित्रों की आवश्यकता होती है ,लेकिन सर्वोच्च सफलता प्राप्त करने के लिए अच्छे शत्रुओं की आवश्यकता होती है। ” मित्र हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। एक...

मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती:

मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती :- एक बार चन्द्रगुप्त ने चाणक्यसे पुछा ,”गुरुदेव अगर सभी की किस्मत पहले से ही लिखी होती है ,जैसा की लोग कहते हैं ,तो हमें कोशिश करने से भी क्या हासिल हो जाएगा। तब चाणक्य ने बहुत ही सुन्दर उत्तर दिया...

चाणक्य कहते हैं :

चाणक्य कहते हैं :- चाणक्य कहते हैं :किसी भी मनुष्य की वर्तमान स्थिति को देख कर उसके भविष्य का उपहास मत उड़ाओ क्यूंकि काल मे इतनी शक्ति है की वो एक मामूली से कोयले के टुकड़े को भी हीरे मे बदल सकता है। अर्थात्: समय बहुत ही बलवान है।...

देश के प्रति हमारी जिम्मेदारी और कर्तव्य :

देश के प्रति हमारी जिम्मेदारी और कर्तव्य :- किसी भी देश के नागरिकों के कुछ मौलिक अधिकार होते हैं। वह अपने इन मौलिक अधिकारों का  तो बहुत अच्छी तरह से इस्तेमाल करता है।पर उसे इस के साथ-साथ ये भी समझना होगा कि उसकी अपने देश के प्रति भी कुछ...

हमेशा अपने कार्यों और विचारों से सकारात्मक रहें :

हमेशा अपने कार्यों और विचारों से सकारात्मक रहें :- हमेशा जब भी सोचें सकारात्मक सोचें क्योंकि हम वैसा ही बन जाते हैं जैसा हम सोचते हैं।यदि हम हर वक्त नकारात्मक ही सोचते रहेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि ये नकारात्मकता हम पर पूर्ण रूप से हावी हो जायेगी...

अच्छी आदतें :

अच्छी आदतें :- दूसरों को इज्जत और सम्मान देना और साथ ही साथ स्वयं को भी इज्जत की निगाहों से देखना ,दूसरों और स्वयं के प्रति विनम्रता, शांति और शिष्टाचार का भाव रखना ही अच्छी आदत है।जब कोई हम से बुरी तरह से पेश आता है ,मसलन वो हमें कभी...

हमारे बुजुर्ग और हम :-

 हमारे बुजुर्ग और हम  :- हमारे बुजुर्ग एक बरगद के पेड़ की तरह होते हैं। जिस प्रकार बरगद का पेड़ अपनी शाखाओं को फैला कर हमें छाया ,सुख और शान्ति प्रदान करता है ,उसी प्रकार हमारे बुजुर्ग भी अपने प्यार ,देखभाल और संरक्षण को हमारे चारों ओर फैला देते...

जरूरत से ज्यादा सीधा और मासूम नहीं होना चाहिए :-

जरूरत से ज्यादा सीधा और मासूम नहीं होना चाहिए :- चाणक्य कहते हैं जिस प्रकार सीधे खड़े पेड़ काट लिए जाते हैं और टेढ़े खड़े पेड़ बच जाते हैं उसी तरह ज्यादा सीधा साधा होना  ठीक नहीं है। चाणक्य की ये बात आज के सन्दर्भ मे कितनी सही लगती है।आज हर कोई एक दूसरे का...

हम कहाँ जा रहे हैं ?

हम कहाँ जा रहे हैं ? पुराने समय में लोग जंगलों में रहते थे या गुफाओं में रहते थे ।वे अपने भोजन की पूर्ति कंद -मूल खा कर या जंगली जानवरों का शिकार कर के किया करते थे।तब कोई भी धर्म नहीं था और न ही कोई जाति थी और...