CONTEMPLATIVECHARACTER:

The man of the weak character is like a cane that bends over every gust of the air – Magh

VIZ Just as the cane bends on every breath of the air, in the same way, a person with a weak character gets pulled towards by any temptation .Every day new temptation attracts him and he always immersed in the subject turns towards one greed or the other. Thus, his character does not have any firmness.

Being a very learned man, man cannot attain self-esteem. He must be gentleman to attain self-esteem. Character is more precious than education-PremChand

VIZ There is nothing in being very scholar. If a person is characterless even after attaining the knowledge then his attaining education is useless because even after attaining education, he did not understand the importance of a good character. Only those people can get pride in the eyes of others and in the eyes of themselves, who are virtuous. Therefore, the value of education beyond the character is very low.

Character is tree, reputation shadow-lincoln

VIZ The character is like a tree. As the tree grows from a small plant into huge tree, in the same way, the person is also gradually forming his character and one day it happens that the person is become reputed by his character throughout the world. A person who becomes virtuous remains in the shadow of his reputation.

Purification of character should be the goal of all knowledge – Mahatma Gandhi

VIZ Only the knowledge gained by that person is successful, which has put his knowledge into character purification. Because only the person whose character is pure can contribute to the formation of society. Any country, whose society is virtuous, cannot be stopped by anyone, to progress. Therefore, the goal of all knowledge should be the purification of the character.

Human on character-force, remains firmly in the world of daily work, temptation and testing and can bear the gradual decadence of real life-smiles

VIZ Many small difficulties come in life. In every moment, we have to face one or the other temptation. Every moment of life is an examination. In such a case, only that person who is virtuous, able to face all of them. That is because his heart is steady and he has conquered his senses. The person, Who has controlled his senses due to his virtues, he cannot stopped by  any difficulty in life, any temptation, any daily work. He firmly encounters them all.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

विचारणीय:चरित्र:

दुर्बल चरित्र का व्यक्ति उस सरकंडे जैसा है ,जो हवा के हर झोंके पर झुक जाता है-माघ

अर्थात् जिस प्रकार सरकंडा हवा के हर झोंके पर झुक जाता है उसी प्रकार दुर्बल चरित्र वाला व्यक्ति भी कोई भी प्रलोभन आने पर उसी ओर खिंचा चला जाता है।नित नए नए प्रलोभन उसे अपनी और आकर्षित करते हैं और वह विषय-वासना में डूबा हुआ कभी एक की ओर तो कभी दूसरे लोभ-लालच की ओर झुकता चला जाता है।इस प्रकार उसके चरित्र में दृढ़ता नहीं होती।

बहुत विद्वान होने से मनुष्य आत्म-गौरव नहीं प्राप्त कर सकताइसके लिए सच्चरित्र होना परमावश्यक हैचरित्र के सामने विद्या का मूल्य बहुत कम है –प्रेमचंद

अर्थात् बहुत अधिक विद्वान होने से कुछ नहीं होता।यदि व्यक्ति विद्या प्राप्त करने के बाद भी चरित्रहीन है तो उसका विद्या प्राप्त करना व्यर्थ है क्योंकि विद्या पा कर भी वो अच्छे चरित्र का महत्व नहीं समझ पाया।केवल वही व्यक्ति दूसरों की नजरों में और स्वयं की भी नजरों में गौरव प्राप्त कर सकता है जो चरित्रवान हो।इसलिए चरित्र के आगे विद्या का मूल्य बहुत कम है।

चरित्र वृक्ष है,प्रतिष्ठा छाया-लिंकन

अर्थात् चरित्र एक वृक्ष के समान है।जिस प्रकार वृक्ष एक छोटे पौधे से बढ़ते-बढ़ते घना वृक्ष बन जाता है उसी प्रकार व्यक्ति का भी धीरे-धीरे चरित्र निर्माण होता है और एक दिन ऐसा आता है कि व्यक्ति संसार भर में अपने चरित्र के द्वारा प्रतिष्ठित हो जाता है।इस प्रकार चरित्रवान हुआ व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा की छाया में रहता है।

चरित्र की शुद्धि ही सारे ज्ञान का ध्येय होना चाहिए-महात्मा गांधी

अर्थात् केवल उस व्यक्ति द्वारा अर्जित ज्ञान ही सफल है जिसने अपने ज्ञान को चरित्र शुद्धि में लगा दिया।क्योंकि केवल वही व्यक्ति जिसका चरित्र शुद्ध है समाज निर्माण में योगदान कर सकता है।जिस देश का समाज चरित्रवान होगा उस देश को आगे बढ़ने से कोई भी रोक नहीं सकता।इसलिए चरित्र की शुद्धि ही सारे ज्ञान का ध्येय होना चाहिए।

चरित्र-बल पर मानव दैनिक कार्य ,प्रलोभन और परीक्षा के विश्व में दृढ़तापूर्वक स्थिर रहते हैं और वास्तविक जीवन की क्रमिक क्षीणता को सहन करने योग्य होते हैं-स्माइल्स

अर्थात् जीवन में अनेकों छोटी-बड़ी कठिनाइयाँ आती रहती हैं।प्रतिक्षण हमें विभिन्न प्रलोभनों से दो-चार होना पड़ता है।जीवन का हर पल एक परीक्षा होता है।ऐसे में केवल वही व्यक्ति जो चरित्रवान होता है,इन सब का सामना करने में सक्षम होता है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसका मन स्थिर होता है और उसने अपनी इन्द्रियों पर विजय पा ली होती है।जिसने अपने चरित्र बल के कारण अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण कर लिया हो,उसको जीवन की कोई कठिनाई,कोई प्रलोभन,कोई दैनिक कार्य रोक नहीं सकते।वो दृढ़तापूर्वक इन सब का सामना करता है।