CONTEMPLATIVE-DETERMINATION:

Everything becomes bigger or smaller by our determination-Yog Vashishth

VIZ whatever a Person thinks in his mind, the same happens in his life .Any work can become big or small, depending on a person’s determination. If the person determined his mind then every work will become simpler for him. However, if he will fear to do that work, that work will look impossible to him. If we do every work with full determination then there is no doubt that the work will not look simpler that is why we should always try to strengthen our determination.

Nothing is impossible for stubborn-Ashvghosh

VIZ That person, who determine in his mind that he will complete that work, that work become simpler for him. Just like an ant with a piece of sugar in his mouth, who despite falling again and again ,with his determination cross the wall ,the same way, despite failure again and again, if man does not lose his determination to complete that work and be successful, can complete a work successfully. That is why it is said that nothing is impossible for stubborn.

Without any passion, great talent cannot arise – Aristotle

VIZ If a person does not have the desire to learn something, to do something or to become something then how can he become something? Unless he will learn anything, then where will the ability to move forward in it? Even if he learned something but If there is no desire to do something in it, then how will he start any work and without making any goal, how can he become great? To become a great talent should be the desire to become great within the person.

Make your discretion your teacher, Match words with karma and karma with words-Shakespeare

VIZ The person should know how to distinguish between the good and the bad. The person should be so rational that he will always speak good and sweet words and will say dear. In addition, if the person is rational, then he will take his words into action and will do good and dear work. The words and deeds of a rational person are not differ. As he speaks, his deeds are done. That is why a person should by using his determination should strengthen his discretion so that he can be noble.

Let my mind’s resolutions be complete, my voice be of true behavior– Yajurveda

VIZ If a person is always lying, then how will the pledge within him be fulfilled. He will continue to make resolutions and because he has a habit of lying in his mind, he will never be able to fulfill those resolutions. When the person is truthful with his mind, karma, promise only then can all the resolutions of his mind be fulfilled. The person’s whose speech will be of true behavior, means, who never  lie, only such person can have such a resolutions in his  mind Which can be come true.

HINDI TRANSLATION:

विचारणीय:संकल्प:

सब कुछ अपने संकल्प द्वारा ही बड़ा या छोटा बन जाता है –योग वशिष्ठ

अर्थात् व्यक्ति जैसा भी अपने मन में विचारता है,वैसा ही उसके जीवन में भी घटित होता है।किसी भी काम को छोटा या बड़ा बनाना भी उसके संकल्प पर ही निर्भर करता है।यदि व्यक्ति मन में ठान ले तो कोई भी कार्य उसके लिए छोटा हो जाता है।वहीँ यदि वो कार्य करने से ही डर जाएगा तो वही कार्य उसे बड़ा लगने लगेगा।यदि हम पूरे मन से संकल्प कर के कोई काम करेंगे तो कोई शक नहीं है कि वो काम शीघ्रता से समाप्त न हो।इसलिए हमेशा अपनी संकल्प शक्ति को दृढ करने का प्रयत्न करते रहना चाहिए।

हठी के लिए कुछ भी असाध्य नहीं है-अश्वघोष

अर्थात् जो व्यक्ति मन में ठान ले कि मैं इस कार्य को कर के ही रहूँगा तो उसे लिए वो कार्य सुगम हो जाता है।जिस प्रकार बार –बार गिरने पर भी,चीनी का टुकड़ा उठाये हुए,चींटी हठ ठान कर दीवार पर चढ़ने का प्रयास नहीं छोडती और अंत में दीवार को पार कर ही लेती है,उसी प्रकार मनुष्य भी यदि बार –बार असफल होने पर भी उस कार्य को करने का पूरा करने का और सफल होने का हठ न छोड़े तो अंततः उस कार्य को सफलता पूर्वक पूरा कर ही लेता है।इसलिए कहा गया है कि हठी के लिए कुछ भी असाध्य नहीं है।

लगन के बिना किसी में महान प्रतिभा उत्पन्न नहीं हो सकती-अरस्तु

अर्थात् यदि व्यक्ति में कुछ सीखने की,कुछ करने की या कुछ बनने की लगन ही न हो तो वो कैसे कुछ बन सकता है।जब तक वो कुछ सीखेगा ही नहीं तो उसमें आगे बढ़ने की काबीलियत कहाँ से आएगी।अगर उसने कुछ सीख भी लिया किन्तु उसमें कुछ करने की लगन ही नहीं है तो वो किसी कार्य को कैसे शुरू करेगा और बिना कोई लक्ष्य बनाये वो महान कैसे बनेगा।महान प्रतिभा उत्पन्न होने के लिए व्यक्ति के अन्दर महान बनने की लगन होनी चाहिए।

अपने विवेक को शिक्षक बनाओ,शब्दों का कर्म से और कर्म का शब्दों से मेल कराओ-शेक्सपियर

अर्थात् व्यक्ति के अन्दर अच्छे-बुरे के अन्दर भेद करना आना चाहिए।व्यक्ति को इतना विवेकशील होना चाहिए कि वो हमेशा अच्छे शब्द बोले,मधुर बोले और प्रिय बोले।पर यदि व्यक्ति विवेकशील होगा तभी वो अपने शब्दों को कर्म में उतार पायेगा और अच्छे,प्रिय कर्म करेगा।विवेकशील व्यक्ति के शब्दों और कर्मों में अंतर नहीं होता।वो जैसा बोलता है,वैसे ही उसके कर्म होते हैं।इसलिए व्यक्ति को संकल्प द्वारा अपने विवेक को इतना मजबूत करना चाहिए कि व्यक्ति सत्चरित्र बन सके।

मेरे मन के संकल्प पूर्ण हों,मेरी वाणी सत्य व्यवहार वाली हो-यजुर्वेद

अर्थात् यदि व्यक्ति हमेशा झूठ बोलता रहेगा तो उसके भीतर उत्पन्न संकल्प पूर्ण कैसे होंगे।वो संकल्प बनाता रहेगा और क्योंकि उसके मन में झूठ का वास है वो उन संकल्पों को कभी भी पूरा नहीं कर पायेगा।जब व्यक्ति मन,कर्म,वचन से सच्चा होता है तभी उसके मन के सभी संकल्प पूर्ण हो सकते हैं।जिस व्यक्ति की वाणी सत्य व्यवहार वाली होगी अर्थात् जो कभी झूठ नहीं बोलता होगा केवल वही व्यक्ति मन में ऐसे संकल्प रख सकता है जो सत्य हों।