CONTEMPLATIVE –GENTLEMAN-NOBLENESS:

This is the symptom of gentlemen that they are always compassionate- Mahabharata

VIZ The gentleman person is that one, who is the master of truth, love, and other virtues. When a person is feeling compassionate, helps everyone in need, is happy in the happiness of others, and feel sad in the grief of the others, and thus he becomes pure in his mind. By being clean from the mind, it becomes away from the lie. Because of the communication of virtues within him, he get away from the evils and this is the character of the gentleman person.

Gentlemen, just like the clouds, only accept something to donate – Kalidasa

VIZ Just like the clouds take water from the ponds, reservoirs, rivers and seas and then donates the same water to this world, in the form of rain, in the same way, the person who is gentleman, does not keep any item himself after receiving it. His purpose is that, the object will be used for the welfare of human beings, so he donates that item for welfare.

Respect for others and the correctness of the behaviors, these are the two main traits of a gentleman- डिजरायली

VIZ The gentleman person is the one whose mind is the house of truth and there is no deception in him. When a person’s thoughts are pure, then virtues will be inhabited, within him. The person, who knows to respect others, keeps away from pride and arrogance. The person who does not have the ego within is gentleman. Therefore, Respect for others and the correctness of the behaviors, these are the two main traits of gentleman.

Gentleman person, without saying anything, fulfills the hope of others, just as the sun is spreading its light everywhere-Chanakya

VIZ The sun does not spread its light, by anyone’s saying. He himself spreads the light everywhere. In the same way, the gentleman knows, without anyone’s asking, what is needed for them? He, without anyone’s request, fulfills their hopes. There is a great difference between helping him after being demanded by him and helping someone without being told anything. When the person asks for help then he is filled with a kind of embarrassment. But when he gets help without demanding, he is filled with gratitude towards the giver. It is a sign of a gentleman that he does not want to show low to anyone.

Gentleman person is very humble in doing favor on others and it seems that he is getting favor, while he is doing-C. Newman

VIZ There is another specialty of the gentleman that he never do ego for the donation given by him and remains humble. Though he is doing beneficence, but he becomes so shy that he feels that he is beneficiating himself. This gentleman is a virtue of men.

HINDI TRANSLATION:-

विचारणीय:सज्जन –सज्जनता :

सज्जनों का यह लक्षण है कि वे सदैव दया करनेवाले और करुणाशील होते हैं-महाभारत

अर्थात् सज्जन व्यक्ति वह है जो सच्चाई,प्रेम,और अन्य सद्गुणों का स्वामी हो।जब व्यक्ति दया भाव रखता हो,वक्त पड़ने पर सबकी मदद करता हो और दूसरों की ख़ुशी में खुश और उनके गम में दुखी हो तब वो मन से निर्मल हो जाता है।मन से निर्मल हो कर वो झूठ से दूर हो जाता है।सद्गुणों का उसके अन्दर संचार होने के कारण वो दुर्गुणों से दूर होता है और यही सज्जन व्यक्ति के लक्षण हैं।

मेघों के समान सज्जन पुरूष भी दान करने के लिए ही किसी वस्तु को ग्रहण करते हैं-कालिदास

अर्थात् जिस प्रकार मेघ तालाबों,जलाशयों,नदियों और समुन्द्रों से जल ग्रहण करते हैं और फिर वर्षा के रूप में उसी जल को इस सृष्टि को दान कर देते हैं,उसी प्रकार जो व्यक्ति सज्जन होता है वो कोई भी वस्तु ग्रहण करने के पश्चात् अपने पास नहीं रखता।उसका उद्देश्य होता है कि वो वस्तु मानव मात्र के कल्याण के काम आये,इसलिए वो उस वस्तु को कल्याण की खातिर दान कर देता है।

व्यवहारों की शुद्धता और दूसरों के प्रति आदर यही सज्जन मनुष्य के दो मुख्य लक्षण हैं-डिजरायली

अर्थात् सज्जन व्यक्ति वही है जिसके मन में सत्य का वास हो,कोई कपट उसके भीतर न हो।जब व्यक्ति के विचार शुद्ध होंगे तभी उसके भीतर सद्गुणों का वास होगा।जो व्यक्ति दूसरों का आदर करना जानता है,वह अभिमान और अहंकार से कोसों दूर रहता है।जिस व्यक्ति के भीतर अहंकार नहीं होता वही सज्जन है।इसलिए व्यवहारों की शुद्धता और दूसरों के प्रति आदर यही सज्जन मनुष्य के दो मुख्य लक्षण हैं।

सज्जन पुरूष बिना कहे ही दूसरों की आशा पूरी कर देते हैं,जैसे सूर्य स्वयं ही घर-घर प्रकाश फैला देता है-चाणक्य

अर्थात् सूरज किसी के कहने से ही रोशनी नहीं फैलाता।वो तो स्वयं ही घर-घर प्रकाश फैला देता है।ठीक उसी प्रकार सज्जन पुरूष बिना किसी के द्वारा याचना किये ही जान जाता है कि दूसरे को किस चीज की आवश्यकता है।वह बिना कहे ही दूसरों की आशा पूरी कर देता है।किसी के द्वारा कहे जाने के बाद उसकी मदद करना और बिना कहे ही किसी की मदद करना दोनों में बहुत अंतर है।जब व्यक्ति मदद मांगता है तो वह एक तरह की शर्मिंदगी से भर जाता है।पर वहीं जब उसे बिना मांगे ही मदद मिल जाती है तो वह देने वाले के प्रति कृतज्ञता से भर जाता है।किसी को नीचा न दिखाना ही सज्जन पुरूष की निशानी है।

सज्जन दूसरों का उपकार बहुत विनम्रता से करता है और ऐसा लगता है कि वह उपकार पा रहा है,जबकि वह कर रहा है-सी० न्यूमैन

अर्थात् सज्जन पुरूष की एक और खासियत होती है।वो कभी भी दिए गए दान का अहंकार नहीं करता अपितु विनम्र बना रहता है।हालांकि वह उपकार कर रहा होता है किन्तु वह इतना संकोची हो जाता है कि लगता है कि वो स्वयं उपकार पा रहा हो।यही सज्जन पुरूष की निशानी होती है।