CONTEMPLATIVE-Karma:

The result of bad deeds can never be auspicious. For bad deeds pain and suffering will definitely have to suffer – Swami Vivekananda
VIZ When a person does bad deeds, all people start to hate him. Even nobody helps such a person in need. By doing bad deeds, not only does he hurt others but he also does bad for himself. He falls into the pit of sins and thus does not get salvation and thus he becomes the authorized to suffer sufferings of hell. It means that the result of evil deeds is never auspicious.

The same act is the best, from which more and more people can get greater happiness – Francis Hutchinson
VIZ The best karma is that, which has been done by thinking about the good of all. When a person works for the welfare of other people, not only does others get pleasure from it, but he himself receives immense pleasure from it that he came to work for welfare of someone in life and because of this, a smile appeared on somebody’s face. Therefore, we should always do charity & social welfare works.

The attainment of enjoyment does not come from desires, but is from deeds – Acharya Nishant Sagar
VIZ we cannot get enjoyment only by desiring it. It is necessary to work hard to get the enjoyment. Even diamond is stone. However, when it is cut only then it gets a reputation as a diamond. In the same way, to achieve enjoyment and pleasure, we must do karma. Only then, we can get all the pleasures.

Whatever work you do with a feeling of love and service, it takes you closer to God. But whatever work you do with a feeling of hatred, takes you away from God-Satya Saibaba
VIZ God is hungry for love. All human beings are his offspring. But when a person performs a task full of harm or hatred, then it is like harming the God. In this way, he gets away from God. But if a person works by filling himself with charity and love, then he provides happiness to all. To provide happiness to God’s children means, to provide happiness to God and thus such man goes even more closer to God.

Hard work is such key, which opens the door of fate- Chanakya
VIZ What can a person not be able to achieve by hard work? The person who is always trying and never gets scared by hard work, only that person can taste the success. That is to say, that the key to the door of fate is hard work, which by opening the doors of fate, provides fame to him.

HINDI TRANSLATION-हिंदी अनुवाद:

विचारणीय:कर्म:

बुरे कर्मों का परिणाम कभी शुभ नहीं हो सकता।बुरे कर्मों के लिए पीड़ा और क्लेश अवश्य भोगना पड़ेगा-स्वामी विवेकानंद
अर्थात् जब व्यक्ति बुरे कर्म करता है तो सभी लोग उससे घृणा करने लगते हैं।ऐसे व्यक्ति की कोई जरूरत पड़ने पर भी मदद नहीं करता।बुरे कर्म कर के न केवल वह अन्यों को कष्ट पहुंचाता है बल्कि खुद का भी बुरा करता है।वह बुराइयों के गर्त में गिर जाता है और इस प्रकार उसे मुक्ति नहीं मिलती और वो नरक के दुःख भोगने का अधिकारी हो जाता है।कहने का अर्थ है कि बुरे कर्मों का परिणाम कभी भी शुभ नहीं होता।

वही कर्म श्रेष्ठ है,जिससे अधिक-से-अधिक लोगों को अधिक-से-अधिक आनंद की प्राप्ति हो-फ्रांसिस हचिंसन
अर्थात् सब से अच्छा कर्म वही है जो सभी की भलाई के विषय में सोच कर किया गया हो।जब व्यक्ति अन्य लोगों के भले के लिए कार्य करता है तो उससे न केवल सभी को आनंद प्राप्त होता है बल्कि ऐसे कर्म करने वाले को भी ये सोच कर असीम आनंद मिलता है कि वो जीवन में किसी के काम आया और उसके कारण किसी के चेहरे पर मुस्कान आई।इसलिए सदा परोपकार का कार्य करना चाहिए।

भोगों की प्राप्ति इच्छाओं से नहीं होती,वरन कर्मों से होती है-आचार्य निशांत सागर
अर्थात् किसी भी वस्तु की इच्छा रखने मात्र से वो वस्तु हमें नहीं मिल सकती।भोगों की प्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।हीरा भी पहले पत्थर ही होता है।पर जब उसे तराशा जाता है तभी हीरे के रूप में प्रतिष्ठा पाता है।उसी प्रकार भोग-विलास प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को कर्म करना पड़ता है।तब जा कर उसे सभी सुख-सुविधाएँ मिल पाती हैं।

जो भी कार्य तुम प्रेम और सेवा की भावना से करते हो वह तुम्हें परमात्मा के निकट ले जाता है।लेकिन जिस कार्य में घृणा,द्वेष छिपा होता है वह तुम्हें परमात्मा से दूर ले जाता है-सत्य साईबाबा
अर्थात् भगवान् प्रेम का भूखा होता है।सभी मनुष्य उसकी संतान हैं।लेकिन जब व्यक्ति किसी को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से अथवा घृणा,द्वेष से भरा हुआ कोई कार्य करता है तो वह भगवान को ही हानि पहुँचाने के समान है।इस प्रकार व्यक्ति भगवान् से दूर हो जाता है।पर यदि व्यक्ति परोपकार और प्रेम से भर कर कार्य करता है तो वह सभी को आनंद प्रदान करता है।भगवान् के बच्चों को आनंद प्रदान करने का अर्थ है भगवान् को प्रसन्न करना और इस प्रकार ऐसा व्यक्ति भगवान् के और भी करीब हो जाता है।

मेहनत वो चाबी है जो किस्मत का दरवाजा खोल देती है-चाणक्य
अर्थात् मेहनत से व्यक्ति क्या नहीं पा सकता?जो व्यक्ति सदा प्रयत्नशील रहता है और मेहनत से कभी नहीं घबराता केवल वही व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकता है।कहने का अर्थ है कि किस्मत के दरवाजे की चाभी मेहनत है जो किस्मत के दरवाजे खोल कर मनुष्य को प्रतिष्ठित करती है।