CONTEMPLATIVE-KNOWLEDGE

Knowledge is like Kamdhenu cow–Chanakya

VIZ  The way Kamadhenu cow fulfills all our wishes, in the same way, by means of knowledge one can attain whatever the person wants .A person, with the help of the strength of knowledge ,can easily face bigger problems and  can attain the height  of success ,after overcoming  the obstacles  .Thus, Knowledge is Kamdhenu, who not only honors the person with wealth, but also gives high altitude to his reputation .

Ultimate goal of knowledge should be character-creation-Mahatma Gandhi

VIZ Everything cannot done only by acquiring knowledge. If a person is educated but is characterless, then he cannot get anything in life. He falls in the eyes of all and lives an unsuccessful life. The person who even after attaining knowledge does not recognize the good and evil, his knowledge is in vain. The benefit of earning knowledge is only when the person recognizes the good and bad and emphasizes the need to create his own character through knowledge.

A person who does not have a wise eye, is like a blind person-Hitopdesh

VIZ Knowledge is the eyes of a person that teach him to identify the good and bad, guide them in difficulties and show them the right path in every moment of life. The one who does not have a wise eye is like a person who is blind. The blind person does not see anything; in the same way, the illiterate person does not see anything good or bad. He became nervous with difficulties and lose his direction. That is why attaining knowledge is very important.

Knowledge destroys ignorance the same way, as if the sharp darkness destroys the group-Swami Shankracharya

VIZ As the illumination kills darkness, in the same way when a person becomes educated then his ignorance in his brain is destroyed because he starts to decide everything on the basis of logic and thus, he starts to recognize good and bad. Literally, knowledge destroys the ignorance inside him.

Knowledge is priceless and immortal wealth-Gladstone

VIZ Knowledge is a treasure that can never be destroyed. Because it exists within us, so no one can steal it. The knowledge goes from one man to another, that is, it is never decayed. Other wealth can be destroyed can be stolen, but no one can steal the knowledge. It helps the person to build his character and bring his reputation to new heights. That is why education is an invaluable wealth.

HINDI TRANSLATION:हिंदी अनुवाद

विचारणीय:विद्या:

विद्या कामधेनु है-चाणक्य

अर्थात् जिस प्रकार कामधेनु गाय हमारी सभी मुराद पूरी करती है ,उसी प्रकार विद्या के द्वारा भी व्यक्ति जो चाहे प्राप्त कर सकता है।विद्या के बल पर व्यक्ति बड़े से बड़े संकट का भी सामना कर सकता है और हर बाधाओं को पार कर के सफलता की ऊँचाइयों को छूता है।इस प्रकार विद्या वो कामधेनु है जो व्यक्ति को न केवल शान-ओ-शौकत से नवाजती है बल्कि उसकी प्रतिष्ठा को भी ऊँचाइयों तक पहुंचा देती है।

विद्या का अंतिम लक्ष्य चरित्र-निर्माण होना चाहिए-महात्मा गांधी

अर्थात् केवल विद्या प्राप्त करने से ही सब कुछ नहीं होता।यदि व्यक्ति पढ़ा-लिखा है कितु चरित्रहीन है तो वो जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता।वह सब की नजरों में गिरा रहता है और एक असफल जीवन जीता है।जो व्यक्ति विद्यावान होते हुए भी भले-बुरे की पहचान नहीं रखता उसकी विद्या व्यर्थ है।विद्या अर्जन का फायदा तभी है जब व्यक्ति भले-बुरे की पहचान रखे और विद्या के द्वारा अपने चरित्र निर्माण पर बल दे।

जिसके पास विद्यारूपी नेत्र नहीं,वह अंधे के समान है-हितोपदेश

अर्थात् विद्या व्यक्ति की वो आँखें हैं जो उसको भले-बुरे की पहचान करना सिखाती हैं,कठिनाइयों में उसका मार्गदर्शन करती हैं और जीवन के हर पल में उसे सही राह दिखाती हैं।जिस के पास विद्यारूपी नेत्र नहीं होते वो व्यक्ति अंधे के समान है क्योंकि जिस प्रकार अंधे व्यक्ति को कुछ नहीं दिखाई देता ,उसी प्रकार से विद्याहीन व्यक्ति को अपना भला-बुरा कुछ नहीं दिखाई देता।वह कठिनाइयों से घबरा जाता है और दिशाहीन हो जाता है।इसलिए विद्यार्जन बहुत ही जरूरी होता है।

विद्या अविद्या को वैसे ही नष्ट कर देती है ,जैसे कि तेज अन्धकारसमूह को नष्ट कर देता है-स्वामी शंकराचार्य

अर्थात् जिस प्रकार रोशनी होने से अज्ञान का खात्मा हो जाता है उसी प्रकार जब व्यक्ति विद्यार्जन कर लेता है तो उसके मस्तिष्क में उपजने वाली अज्ञानता नष्ट हो जाती है क्योंकि वो हर बात को तर्क की कसौटी पर कसने लग जाता है और इस प्रकार अच्छे-बुरे की पहचान करने लग जाता है।अर्थात् विद्या उसके भीतर की अविद्या को नष्ट कर देती है।

विद्या अमूल्य और अनश्वर धन है-ग्लैडस्टन

अर्थात् विद्या एक ऐसा धन है जो कभी भी नष्ट नहीं हो सकता।क्योंकि ये हमारे भीतर ही मौजूद होता है इसलिए कोई भी इसे चुरा नहीं सकता।विद्या एक मनुष्य से दूसरे तक पहुँचती रहती है अर्थात् इसका कभी भी क्षय नहीं होता।अन्य धन नष्ट हो सकते हैं,चुराए जा सकते हैं,किन्तु विद्यारूपी धन को कोई भी चुरा नहीं सकता।ये व्यक्ति को उसके चरित्र निर्माण में मदद करता है और उसकी प्रतिष्ठा को नयी ऊंचाईयों तक पहुंचाता है।इसलिए विद्या एक अमूल्य धन है।