CONTEMPLATIVE: LORE:

विचारणीय:विद्या:

Lore gives humility, from humility comes aptitude, from aptitude comes money, from money comes dharma and from dharma we get peace and happiness-Hitopdesh

VIZ When we are full of education, then we know about what is good and what is bad for us. We learn to behave with love and learn to speak politely. The sense of vanity vanishes from inside us. When we become humble, due to lack of vanity we do want to learn more. Thus, we become more qualified. When we become qualified, wealth comes automatically to us. Because of the virtue of our wisdom we begin to put this money in good works, hence dharma begins to come within us and we become more philanthropic. Thus, the happiness we get by giving happiness to others is the true happiness. It is advisable to say that the reason for all good qualities and deed is to gain knowledge.That is why we should always be engaged in gaining knowledge.

विद्या विनय को देती है,नम्रता से योग्यता मिलती है,योग्यता से धन,धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है-हितोपदेश

अर्थात् जब हम विद्या से भरपूर होते हैं,तो अपना भला बुरा सब समझते हैं।हम सभी से प्रेम से व्यवहार करना और विनम्रता से बोलना सीख जाते हैं।हमारे भीतर से घमंड की भावना ख़त्म हो जाती है।जब हम विनम्र हो जाते हैं तो घमंड न होने के कारण हम और अधिक सीखने की इच्छा रखते हैं।इस प्रकार हम और अधिक योग्य होते चले जाते हैं।जब हम योग्य हो जाते हैं तो हमें धन संपत्ति स्वत: ही प्राप्त होने लगती हैं।हम इस धन को अपनी विद्या के सद्गुण के कारण अच्छे कार्यों में लगाने लगते हैं जिससे हमारे अन्दर धर्म का आगमन होने लगता है और हम अधिक परोपकारी हो जाते हैं।इस प्रकार दूसरों को सुख दे कर जो सुख हमें मिलता है वही सच्चा सुख होता है।कहने का तात्पर्य है कि समस्त अच्छाइयों और गुणों का कारण विद्यार्जन करना है।इसलिए हमें हर वक्त विद्यार्जन में लगे रहना चाहिए।

Like a man digging from a spade, the man gets the water of the ocean, similarly the guru knowledge is attained from the service of the guru-Chanakya

Viz The way ,we get water from the ground ,when we shovel it or bore it ,the same way guru gives us knowledge ,only then, when, we, by our service,respect,love and good qualities, captivate him. When we fully respect the guru, only then we can get the knowledge distributed by him.it means to say that we should always give respect to our gurus and be always in their service.

जैसे कुदाली से खोदकर मनुष्य पाताल के जल को प्राप्त करता है,वैसे ही गुरुगत विद्या सेवा से प्राप्त होती है-चाणक्य

अर्थात् जिस प्रकार जमीन से जल तभी प्राप्त किया जा सकता है जब हम उसे खोदते हैं या उसमें वेधन करते हैं,उसी प्रकार गुरु भी हमें विद्या तभी देता है जब हम अपनी सेवा,अपने आदर,प्रेम और अच्छे गुणों द्वारा उसे मोहित कर लेते हैं।जब हम गुरु को पूरा सम्मान देते हैं,तभी हम उसके द्वारा बांटी जाने वाली विद्या के अधिकारी बन पाते हैं।कहने का अर्थ है कि हमें हमेशा गुरु को सम्मान और आदर की दृष्टि से देखना चाहिए और उनकी सेवा में लगे रहना चाहिए।

Knowledge is such money, which cannot be theft, king cannot take it as penalty, brother cannot divide it, it has no weight, it increases with donation, knowledge is best among all wealth.-Adhyaatm Ramayana.

VIZ knowledge is such wealth which can never be theft because it is in our brain and not in physical form, that’s why, king cannot snatch it from us as penalty, brother cannot divide it .we have no worry to lose it like other wealths.thats why it is not as weight on us. Whereas other wealth decrease by donation, knowledge is such wealth, which increases by distribution. It means, when we give others knowledge, we become more knowledgeable. Knowledge is best among all  wealth due to all these virtues.  

विद्यारूपी धन को चोर चुरा नहीं सकता,राजा दंड के रूप में ले नहीं सकता,भाई हिस्से में बाँट नहीं सकता,उसका बोझ नहीं होता,वह दान देने से नित्य बढती है,विद्या सब धनों में श्रेष्ठ है-अध्यात्म रामायण

अर्थात् विद्या ऐसा धन होता है जो कभी भी चुराया नहीं जा सकता क्योंकि ये हमारे मस्तिष्क में होता है न की भौतिक अवस्था में।इसलिए राजा भी हमसे इसे दंड के रूप में छीन नहीं सकता,न ही भाई इसे बाँट सकता है।हमें हर वक्त अन्य धनों की भांति विद्याधन के खोने की चिंता नहीं होती।इसलिए ये हम पर भार स्वरुप नहीं होता।जहां अन्य धन देने से घटते हैं,वहीं विद्या ऐसा धन है जो औरों को बांटने से बढ़ता है।मतलब हम जब दूसरों को विद्या का दान करते हैं तो हम और अधिक ज्ञान प्राप्त कर पाते हैं।अपने इन्ही गुणों के कारण विद्या सब धनों में श्रेष्ठ होती है।

Good work should be the ultimate goal of education-Sir P.Sydney

VIZ for such person, who even after attaining knowledge, cannot differentiate between right and wrong, attaining knowledge is vain. The right way to use knowledge is only then, when we use it in good works, for teaching others, for helping others and for humanity. Only then, in true sense it can be said that we are scholar.

सुकर्म विद्या का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए-सर पी० सिडनी

अर्थात् विद्या प्राप्त कर के भी जो इस बात में भेद नहीं कर सकता कि क्या करना सही है और क्या करना गलत,ऐसे आदमी के लिए विद्या प्राप्त करना व्यर्थ ही है।विद्या का सही इस्तेमाल तभी है जब हम उसको अच्छे कार्यों में लगाएं।जब हम विद्या का उपयोग औरों को शिक्षित करने,औरों की भलाई और परोपकार में लगाते हैं तभी सच्चे मायने में हम विद्वान् हैं।

The human, which can transform its learning and knowledge into action, is superior than those who lives in dozens of imagination-Emerson

VIZ Many people always create different-different schemes, always remain in dreams but they do not try to convert these dreams into reality .The knowledge attained by such peoples become just like  rusted iron, which has no value. The person, who use his knowledge into action, knowledge of only such person be successful and best. 

जो मानव अपनी विद्या और ज्ञान को कार्यरूप में परिणत कर सकता है ,वह दर्जनों कल्पना करने वालों से श्रेष्ठ है-एमर्सन

अर्थात् कई लोग जीवन में तरह-तरह की योजना बनाते रहते हैं,हर वक्त कल्पना में ही डूबे रहते हैं पर अपनी उन कल्पनाओं को साकार नहीं करते,ऐसे लोगों द्वारा अर्जित विद्या जंग लगे लोहे जैसी हो जाती है जिसका कोई महत्व नहीं होता।जो व्यक्ति अपने द्वारा आर्जित विद्या और ज्ञान को कार्यान्वित करता है उसी के द्वारा अर्जित विद्या सफल कही जायेगी और ऐसा ही व्यक्ति श्रेष्ठ होता है।