Contemplative: Mistakes

Every person can make a mistake, but only fools remains firm on them. – Cicero

Viz When person makes a mistake and does not believe that it has been done by him, nobody can be a bigger fool than him. Because such person can never learn from his mistakes. Only such person who can accept his mistakes, can learn from them and avoid them from repeating them. But if the person does not accept his mistake, then how can he will learn from them and if he will not learn from them, then he will do the mistake repeatedly, that means he will remain firm on his mistake. Such persons are only fools because they will not learn from their mistakes and will constantly repeat the mistakes and will never succeed in the life.

We often, than others virtues, learn more from the mistakes of others. -Longfellow

Viz People often talk less about the properties of others, but they do not lose any chance to point others mistakes. The atmosphere in which the person lives, the way he talks, he becomes just like that. If people keep talking about mistakes, then these mistakes will go away in their life and they will starts doing mistakes.

Just as, the unpolished diamond does not shine, in the same way, man is incomplete without doing mistakes. -Chinese Proverb

Viz No human is perfect at all. Every man does mistake in one or another moment. The mistakes give us a better chance of learning. For what reason this mistake has happened and how can we avoid doing this mistake further, such thoughts improve man’s personality. Humans, after learning from their mistakes can go ahead and sparkle in life just like the gold in the fire. After coming out of the difficulties, who comes by mistakes, people can shine like a diamond.

If human wants to learn, each mistake can teach them something or something. – Dickens

Viz Every mistake tells us where we went wrong and how we can avoid forgetting for the future. But for this we must accept our mistakes. Many people do not accept their mistakes due to their ego and go on making mistakes. But when a person believes that he has done mistakes, then he will also try to find a solution of that mistake and will also learn ways to avoid it. That is why If human wants to learn, each mistake can teach them something or something.

There is sin in doing mistakes, but there is a greater sin in hiding it. -Mahatma Gandhi

Viz If any work is done wrong then it is a sin because due to your wrong doing, there is a loss of someone. But if you accept your mistake and do not repeat it in the future, then the atonement of that mistake will be done to a large extent. But if you do not accept your mistake and try to hide it, then you may do it again in the future. Nothing is more sinner than to do the same mistake again. Hence, there is sin in doing mistakes, but there is a greater sin in hiding it.

विचारणीय:गलती(भूल)

गलती तो हर मनुष्य कर सकता है,किंतु उस पर दृढ केवल मूर्ख ही होते हैं।-सिसरो

अर्थात् जो व्यक्ति गलती करता है और उसको मानता नहीं उससे बड़ा मूर्ख कौन हो सकता है।क्योंकि ऐसा व्यक्ति कभी भी अपनी गलतियों से सीख नहीं सकता।केवल ऐसा व्यक्ति ही जो अपनी गलतियों को स्वीकारे उन से सीख ले कर आगे उनको दोहराने से बच सकता है।पर यदि व्यक्ति अपनी गलती ही नहीं मानेगा तो उन से सीखेगा कहाँ से और सीखेगा ही नहीं तो वोही गलती बार –बार करेगा अर्थात् अपनी गलती पर दृढ रहेगा।ऐसा व्यक्ति मूर्ख ही है क्योंकि वो अपनी गलतियों से सबक नहीं लेगा और उन्ही गलतियों को दोहराता रहेगा और इस तरह जीवन में कभी भी कामयाब नहीं हो पायेगा।

हम बहुधा दूसरों के गुणों की अपेक्षा उनकी गलतियों से अधिक सीख लेते हैं।-लोंगफेलो

अर्थात् लोग अक्सर अन्यों के गुणों के बारे में कम बात करते हैं पर उनकी गलतियां निकालने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते।व्यक्ति जिस तरह के माहौल में रहता है,जिस तरह की बातें करता है वैसा ही हो जाता है।जब व्यक्ति हर समय गलतियों के बारे में ही बातें करता रहेगा तो वोही गलतियां उसके जीवन में भी उतर जायेंगी और वो भी वही गलतियाँ करने लगेगा।

जिस प्रकार बिना घिसे हीरे पर चमक नहीं आती,ठीक उसी तरह बिना गलतियाँ किये मनुष्य सम्पूर्ण नहीं बनता।-चीनी कहावत

अर्थात् कोई भी मनुष्य सम्पूर्ण नहीं होता।प्रत्येक मनुष्य जीवन के हर क्षण में कोई न कोई गलती करता ही रहता है।गलतियां हमें सीखने का एक बेहतर अवसर प्रदान करती हैं।किस कारण से ये गलती हुई और आगे कैसे हम ये गलती करने से बच सकते हैं ऐसे विचार मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारते हैं।मनुष्य अपनी गलतियों से सीख कर आगे बढ़ता है और जीवन में ठीक उसी प्रकार निखर उठता है जिस प्रकार आग में कुंदन।कठिनाइयों से,जो की गलतियां करने के कारण ही आती हैं,निकल कर ही कोई हीरे के समान चमक सकता है।

यदि मानव सीखना चाहे,तो उसकी हरेक भूल उसे कुछ न कुछ शिक्षा दे सकती है।-डिकेन्स

अर्थात् प्रत्येक भूल हमें बताती है कि हमसे कहाँ गलती हुई और कैसे हम आगे के लिए भूल करने से बच सकते हैं।पर इसके लिए हमें भूल को भूल स्वीकारना पड़ता है।कई लोग अपने अहंकार के कारण अपनी गलतियों को नहीं स्वीकारते और गलतियां करते चले जाते हैं।पर जब व्यक्ति मानता है कि वाकई उससे भूल हुई है तो फिर वो उस भूल से आगे के लिए बचने का उपाय भी करेगा और उससे बचने के तरीके सीखेगा।इसलिए कहा है कि यदि मानव सीखना चाहे,तो हर भूल उसे कुछ न कुछ शिक्षा दे सकती है।

भूल करने में पाप तो है ही,परन्तु उसे छिपाने में उससे भी बड़ा पाप है।-महात्मा गांधी

अर्थात् कोई भी कार्य गलत हो जाए तो पाप तो लगता ही है क्योंकि आपके गलत तरीके से किये जाने वाले कार्य से किसी का नुक्सान हुआ है।पर यदि आप अपनी भूल स्वीकार लेते हैं और आगे से उसे नहीं दोहराते तो उस भूल का प्रायश्चित काफी हद तक हो जाता है।किन्तु यदि आप अपनी भूल को भूल ही नहीं मानेंगे और उसको छुपाने की कोशिश करेंगे तो हो सकता है आप भविष्य में फिर से वोही भूल करें।एक बार की गयी भूल से भी बड़ा गुनाह है वही भूल फिर से करना।इसलिए भूल करने में पाप तो है ही परन्तु उसे छिपाने में उससे भी बड़ा पाप है।