HOW TO LIVE LIFE: 8

DO NOT REMAIN OBSESSED WITH PERISHABLE THINGS, BECAUSE DOING SO DISTRACTS US WITH THE TRUE PURPOSE OF LIFE: –

These are our desires which are the root causes of all evils in this world. Some people wish for material things like cars, TVs etc. Whereas, some wants to get strength and power. There are some who wish for fame.

We are unhappy when we do not find what we want to get. When this happens then not only do we feel miserable but also become victims of a kind of bitterness.

This bitterness and grief gives birth to anger inside us and through anger we become unscrupulous. Lord Buddha has taught that the desires are the root cause of anger. That is why he has taught people to be free from desires.

When we meditate then we can control our own desires by controlling our senses. As a result, we can become centered and within ourselves we can feel the divine light and the voice of that Supreme Lord.

When this happens, means, when we feel like that, then we can see the realization of our ultimate objective which is the completion of spiritual journey of our soul to meet the divine.

It is worth noting that, by falling into those activities such as greed, grab etc., into which, our brain shoves us, is like trapping in a vicious cycle. And by getting trapped in this vicious cycle, we lose our happiness and calmness.

However, we must understand that this is not something we want, but there is a tendency in our brain that we always live in a state of wanting something.

When we desire anything, then we get attached to it. Then we go away from the true purpose of life which is “dialogue with our soul”. The dialogue with our soul, namely salvation is the true and last happiness for us.

Whereas the desire of all physical things in this world leads us to discontent and misery, because no physical thing is permanent. We, due to death decay or separation, lose all the materialistic things, in the end.

Even the people we love, they also get separated from us due to death. Only the soul that always lives and beyond this material world, keeps us connected to God.

Therefore, we should not feel attached to the destructive things and should think to the Lord, which is everywhere and eternal, so that we cannot wander, from our ultimate purpose, which is salvation, and we could achieve this objective.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

जीवन कैसे जीयें:८

नाशवान चीजों के प्रति आसक्त न रहें क्योंकि ऐसा करना हमें जीवन के सच्चे उद्देश्य से विचलित करता है :-

ये हमारी इच्छाएं ही हैं जो इस संसार की समस्त बुराइयों की जड़ हैं।कुछ व्यक्ति भौतिक चीजों जैसे कार,टीवी आदि की कामना करते हैं तो कुछ ताकत और सत्ता पाना चाहते हैं।वहीं कुछ ऐसे होते हैं जो प्रसिद्धि की कामना करते हैं।

हम तब दुखी हो जाते हैं,जब हम वो नहीं पाते जो हम पाना चाहते हैं।जब ऐसा होता है तब न केवल हम दुखी महसूस करते हैं बल्कि एक तरह की कडवाहट के भी शिकार हो जाते हैं।

ये कड़वाहट और दुःख हमारे अन्दर क्रोध को जन्म देता है और क्रोध से हम विवेकशून्य हो जाते हैं।भगवान् बुद्ध ने क्रोध की जड़ इच्छाओं को बताया है।इसलिए उन्होंने लोगों को इच्छाओं से मुक्त रहने की शिक्षा दी है।

जब हम ध्यान करते हैं तब हम अपनी इन्द्रियों को अपने वश में कर के अपनी इच्छाओं को काबू में कर सकते हैं।परिणामस्वरूप,हम केन्द्रित हो सकते हैं और स्वयं के भीतर उस परमप्रभु का दिव्य प्रकाश और आवाज महसूस कर सकते हैं।

जब ऐसा होता है अर्थात् जब हम ऐसा महसूस करते हैं,तब हम अपने परम उद्देश्य की प्राप्ति अर्थात् हमारी आत्मा के परमात्मा से मिलन की आध्यात्मिक यात्रा को सम्पूर्ण होते हुए देख सकते हैं।

ध्यान रखने योग्य है कि कब्जाने,लालच करने या उन गतिविधियों में पड़ने से,जिनमें हमारा मस्तिष्क हमें धकेलता है,की भूलभुलैया में फंसना एक दुष्चक्र है।इसमें फंस कर व्यक्ति अपना सुख चैन सब खो बैठता है।

हालांकि,हमें ये समझना होगा कि ये कोई वस्तु नहीं है जिसे हम चाहते हैं,अपितु हमारे मस्तिष्क की प्रवृति है कि हम हमेशा कुछ न कुछ चाहने की अवस्था में रहते हैं।

जब हम किसी चीज की इच्छा करते हैं तो उससे जुड़ जाते हैं।तब हम जीवन के सच्चे उद्देश्य “हमारी आत्मा का परमात्मा से संवाद “से भटक जाते हैं।हमारी आत्मा का परमात्मा से संवाद अर्थात् मोक्ष ही हमारे लिए सच्ची और अंतिम ख़ुशी है।

जबकि इस संसार की समस्त भौतिक वस्तुओं की चाहत,हमें केवल असंतोष और दुःख की ओर ले जाती है,क्योंकि कोई भी भौतिक वस्तु स्थाई नहीं होती।हम सभी भौतिक वस्तुओं को अंत में,मृत्यु के द्वारा,नष्ट होने के कारण,अलग होने के द्वारा अथवा क्षय के द्वारा खो देते हैं।

यहाँ तक कि जिन व्यक्तियों को हम प्यार करते हैं,वो भी मृत्यु के द्वारा हमसे बिछुड़ जाते हैं।केवल आत्मा ही है जो हमेशा रहती है और इस भौतिक संसार से परे,हमें परमात्मा से जोड़े रखती है।

इसलिए हमें नाशवान चीजों के प्रति आसक्त न रह कर प्रभु से मन लगाना चाहिए,जो अनश्वर,शाश्वत और नित्य है,ताकि हम अपने परम उद्देश्य,मोक्ष प्राप्त करना,से न भटकें और इस उद्देश्य को प्राप्त कर सकें।