HOW TO LIVE LIFE: BE COMPASSIONATE:3

Compassion and sympathy have such strength, which can change our life completely. In today’s part-race life, where we are competing against time, it is more necessary that we develop understanding, mutual respect and compassion among our fellow human beings.

In daily newspapers, we read many stories of road accidents, in which a person is left to die and we go ahead without helping him. In fact, there is no wonder that any work of kindness has become rare nowadays.

These words of Mother Teresa that if we do not get peace, then it means that we have forgotten that we are affiliated with each other.

It is the compassion that teaches us to connect with each other. It is a feature that helps us to be separated from our self-centered life. That is why we must live with compassion, practice it every day till it becomes part of our behavior.

And for the pains of others, just showing pity is not enough, because pity is a feeling, which instead of helping the character of our pity, takes us away from him.

At the same time, compassion connects us with that person, because within a compassionate and sensitive person, there is a strong desire to reduce that pain. Practicing sensitivity, is possessed the power to change our life not only in a single form, but also in collective form.

In fact, sensitivity and compassion are the key to opening the door of a better society and the world. Such a person, who is sensitive to the less fortunate ones than himself, and by rising above himself, for such people, who are flurried and sad, are willing to do help, really are true humans.

Thus, when we give place to sympathy and compassion in our hearts, then this world will be transformed into a better place. Because it is sensitivity which makes us realize that we all are affiliated with each other.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

जीवन कैसे जीयें:करुणामय बनें :3

करुणा और दया में वो ताकत होती है ,जो हमारे जीवन को पूर्णतया बदल सकती है।ये आजकल के भाग-दौड़ भरे जीवन में ,जहाँ हम समय से होड़ लगा रहे हैं ,और भी जरूरी है कि हम अपने साथी इंसानों में करुणा और आपसी समझ विकसित कर सकें।

प्रतिदिन समाचारपत्रों में हम सड़क दुर्घटनाओं की अनेकों ख़बरें पढ़ते हैं ,जिनमें व्यक्ति को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है और हम उस व्यक्ति की मदद करने की स्थिति में होते हुए भी ,उस से पीठ मोड़ कर आगे निकल जाते हैं। वास्तव में कोई आश्चर्य नहीं है कि दयालुता का कोई भी कार्य आजकल दुर्लभ हो गया है।

मदर टेरेसा के ये शब्द कि यदि हमें शांति प्राप्त नहीं होती तो इसका अर्थ ये है कि हम भूल चुके हैं कि हम एक दूसरे से सम्बद्ध हैं।

ये करुणा ही है जो हमें एक दूसरे से जुड़ना सिखाती है।ये एक विशेषता है जो हमें हमारी स्वकेंद्रित जिन्दगी से अलग होने में मदद करती है।इसलिए हमें करुणा के साथ रहना होगा ,प्रतिदिन इसका अभ्यास करना होगा, तब तक,जब तक ये हमारे व्यवहार का हिस्सा न बन जाए।

और केवल दूसरों के दुःख-दर्द से ,केवल सहानुभूति दिखाना ही पर्याप्त नहीं है,क्योंकि तरस खाना एक भावना है ,जो हमारी तरस के पात्र को मदद करने की बजाय ,उस से दूर ले जाती है।

वहीं ,करुणा हमें उस व्यक्ति से जोडती है,क्योंकि एक करुणामय और संवेदनशील मनुष्य के अन्दर ,उस दुःख-दर्द को कम करने की एक तीव्र इच्छा होती है।संवेदनशीलता का अभ्यास करना ,हमारे जीवन को न केवल एकांकी रूप में बल्कि सामूहिक रूप में भी बदल सकने की ताकत रखता है।

वास्तव में संवेदनशीलता और करुणा ,एक बेहतर समाज और संसार का द्वार खोलने की चाभी है।ऐसे व्यक्ति ,जो अपने से कम भाग्यशाली व्यक्तियों के साथ संवेदनशील हैं ,और स्वयं से ऊपर उठ कर,ऐसे व्यक्तियों की ,जो दुखी और परेशान हैं ,मदद करने को तैयार हैं ,वास्तव में सच्चे मनुष्य हैं।

इस प्रकार ,जब हम अपने हृदयों में सम्वेदना और करुणा को स्थान देंगे तभी ये संसार ,एक बेहतर जगह में बदल पायेगा।क्योंकि ये संवेदनशीलता ही है जो हमें ये एहसास कराती है कि हम सभी एक दूसरे से सम्बद्ध हैं।