HOW TO LIVE LIFE :Be Happy and Spread Happiness

जीवन कैसे जीयें:खुश रहें और ख़ुशी फैलाएं

हम सभी खुश रहना चाहते हैं और हमारे सभी कार्य केवल ख़ुशी प्राप्त करने के लिए ही होते हैं .पर कटु सत्य यह है कि चाहे सांसारिक रूप से हम कितने भी सफल हो जाएँ पर ख़ुशी हम से तब भी दूर महसूस होती है.

व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि हमारे द्वारा किये गए कर्म और ये संसार ही हमारी व्यग्रता और कष्टों का कारण है .पर हमें अपने दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है .अपना दृष्टिकोण बदल कर ही हम इस बात में भिन्नता पैदा कर सकते हैं कि हम संसार को किस तरह से देखते हैं.

ज्ञानी और अज्ञानी दोनों ही संसार को देखते हैं और दोनों का संसार को देखने की  अपनी समझ होती है और उसी हिसाब से वो दुनिया को देखते हैं .हालांकि संसार एक ही है किन्तु उनका दृष्टिकोण बिलकुल भिन्न है.

हमें आध्यात्मिक रूप से भीतरी दृष्टिकोण को बदलना है न की बाहरी संसार को .इस प्रकार संसार तो वही रहेगा लेकिन हमारा संसार के प्रति नजरिया और प्रतिक्रिया बदल जायेगी.

धर्मग्रंथों में भी कहा गया है कि हमारे दुःख का कारण कोई व्यक्ति ,कर्म अथवा ये संसार नहीं है बल्कि इस संसार को देखने का हमारा नजरिया है.संसार के प्रत्येक कण में भगवान् है और हम सभी इस बात को मानते भी हैं पर हम जब इस सोच को प्रभाव में लाते हैं तो उन लोगों में जिन्हें हम पसंद नहीं करते ,भगवान् को नहीं पाते .

हम अपना ध्यान अपनी कठिनाइयों ,दुखों,दूसरों के दोषों ,संसार में फैली अव्यवस्था पर केन्द्रित रखते हैं और इस बात को नजरअंदाज करते हैं कि इस संसार की प्रत्येक वस्तु भगवान् से व्याप्त है .

जब हम इस दृष्टिकोण से अपूर्ण होते हैं कि एक ही ईश्वर ,सम्पूर्ण जगत के कण-कण में है तो हमें विभिन्नता दिखाई देती है .हम ये जान ही नहीं पाते कि जिस तरह सागर पर तरंगें उठती हैं ,किनारे तक आती हैं और सागर में फिर से समा जाती हैं ,उसी प्रकार ये सम्पूर्ण विश्व भी भगवान् से उपजा है और अंततः उसी में समा जाएगा.

इसलिए इस जगत को भगवान् से व्याप्त देखना चाहिए .तब हमें सम्पूर्ण जगत एक ही दिखाई देगा न कि मैं,तुम,जाति,धर्म आदि में बंटा हुआ जो कि पसंद,नापसंद ,लोभ,लालच,बंटवारे और टकराव का प्रमुख कारण है .

हमें विभिन्नता में भी एकता देखनी चाहिए .हम सब अलग-अलग रंग,वेशभूषा ,जाति धर्म के हो सकते हैं पर सभी में एक ही ईश्वर का वास है .जब हम ऐसा देखने और मानने लगेंगे तो ये सभी अवगुण हमसे दूर हो जायेंगे ,जो दुखों का प्रमुख कारण है .