HOW TO LIVE LIFE: BE HAPPY & SPREAD HAPPINESS -3

जीवन कैसे जीयें:खुश रहें और ख़ुशी फैलाएं :३

व्यक्ति को चाहिए कि वो जो भी करे ,मुस्कुराते हुए करे ,क्योंकि एक मुस्कराहट ही ,सकारात्मक विचार उत्पन्न करती है और यही सफलता की कुंजी है .

जब व्यक्ति ,आत्मज्ञान से परिपूर्ण होता है ,जो कि ध्यान,तप और स्वयं के भीतर खोजने से प्राप्त होता है ,तो वह आनंद से परिपूर्ण होता है .ऐसा व्यक्ति जो भी कार्य करता है,उसे प्रसन्न मन और मुस्कराहट के साथ करता है क्योंकि वो जानता है कि प्रसन्न मन से किये जाने के कारण ,वह कार्य,न केवल सुगम हो जाता है बल्कि व्यक्ति के भीतर ,नकारात्मकता भी,उत्पन्न नहीं होती.

यदि व्यक्ति,कोई भी कार्य ,नकारात्मकता के साथ करेगा तो न तो उसे उस कार्य को करने में ,आनंद आएगा और न वह ,उस कार्य में ,सफल ही हो पायेगा.

वहीँ,हँसते-मुस्कुराते हुए ,कुछ भी करने से ,वो सुगम हो जाता है .साथ-ही-साथ ,मुस्कराहट ,व्यक्ति की ऊर्जा में,वृद्धि करती है .उसको,तनावमुक्त रखती है.

इस प्रकार ,व्यक्ति के भीतर,सकारात्मक विचारों का संचार होता है.इस प्रकार,अपने विचारों का अध्ययन करके,व्यक्ति,सकारात्मक सोच रख सकता है.स्वयं को दोष देना ,एक नकारात्मक सोच है,जो,व्यक्ति की ख़ुशी को नष्ट कर सकती है.कठिनाइयों और चुनौतियों से ,हमेशा, सकारात्मक सोच रखते हुए , निकलने का प्रयत्न करना चाहिए.इस प्रकार ,व्यक्ति,चुनौतियों का,रचनात्मक हल खोजकर ,उनसे पार पा सकेगा और प्रसन्न रह सकेगा.

तप और ध्यान द्वारा ,आत्मज्ञान से परिपूर्ण व्यक्ति,हमेशा सकारात्मक सोच रखता है और इस प्रकार ,प्रत्येक क्षण मुस्कुराते हुए,सभी कठिनाइयों का सामना करता है .क्योंकि वह ,प्रत्येक भौतिक वस्तुओं से ,विचारों से, अनासक्त रहता है ,इसलिए ,वह कोई आशा-निराशा ,मन में नहीं पालता.चूंकि,वह किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता इसलिए कभी निराश नहीं होता .वह जानता है कि अवास्तविक उम्मीद रखने से ,केवल कुंठा और निराशा ही हाथ लगती है.

जीवन के बेहतरीन क्षण,अप्रत्याशित होते हैं.प्रज्ञ व्यक्ति जानता है कि जब उम्मीदें ख़त्म होती हैं तो शान्ति और संतुष्टि शुरू होती है.क्योंकि, यदि व्यक्ति,उम्मीद रखता है और वो पूरी नहीं होती तो उससे कुंठा का जन्म होता है .यहिकुंथा बाद में क्रोध को जन्म देती है .

क्रोध ,तनाव का कारण है और साथ ही साथ दुःख का भी.उम्मीदें ,अक्सर हमारी इच्छाओं के कारण होती हैं ,जबकि आशा ,हमारी इच्छाओं के कारण नहीं होती.जब व्यक्ति कोई आशा रखता है तो वो जानता है कि उसकी वो आशा पूरी हो भी सकती है और नहीं भी.

इस प्रकार ,आत्मज्ञानी व्यक्ति,प्रसन्नतापूर्वक मुस्कुराते हुए ,सभी कार्य करा है और आस-पास के वातावरण को भी ,आनंदमय रखता है.