HOW TO LIVE LIFE: BE HAPPY & SPREAD HAPPINESS:4

खुश रहें और ख़ुशी फैलाएं :४

केवल प्रज्ञ व्यक्ति ही ,संसार को खुशनुमा बना सकता है क्योंकि वह जानता है कि ख़ुशी की कुंजी है -कम की उम्मीद रखना और आध्यात्मिक दौलत इकट्ठी करना ,जो व्यक्ति को ,धार्मिकता की ओर ,ले जाती है .

प्रज्ञ व्यक्ति जो आत्मज्ञानी होता है और स्वयं के भीतर झांकता रहता है ,जानता है कि अन्य व्यक्तियों के साथ ,उसे वैसा ही व्यवहार करना है,जैसा कि वो स्वयं के लिए चाहता है.क्योंकि वो जानता है कि वो आत्मा है और बाकी सब भी आत्मा ही हैं .सभी परमात्मा के अंश हैं इसलिए सभी एक ही हैं.

इस प्रकार प्रज्ञ व्यक्ति ,हमेशा समाज और लोगों की भलाई और सुख के लिए ,प्रयत्नशील रहता है .वो,जो भी निर्णय लेता है ,सभी की भलाई के लिए होता है .ज्ञान ,व्यक्ति को सही राह पर ले जाता है .इस प्रकार सम्पूर्ण समाज का भला होता है .इस प्रकार,जब,प्रज्ञ व्यक्ति ,सम्पूर्ण समाज की भलाई के लिए कार्य करते हैं ,तो सम्पूर्ण समाज में शान्ति और आनंद का माहौल स्थापित हो जाता है .

प्रज्ञ व्यक्ति जानता है कि खुश रहने का उपाय है -अपने लिए ,आध्यात्मिक दौलत को इकठ्ठा करना .वह जानता है कि केवल आध्यात्मिक मूल्य ही व्यक्ति को राह दिखा सकते हैं.और उनकी ऊर्जा को ,सकारात्मक दिशा दे सकते हैं.

प्रज्ञ व्यक्ति,लेने की बजाय ,देने में विश्वास रखता है .वह हमेशा अपने मूल्य ,सद्विचार,प्रेम,स्नेह,करुणा,अन्यों में बांटता है.इस प्रकार एकजूट हुआ व्यक्ति-समाज ,स्वर्ग के समान ,आनंदमय और सुन्दर बन जाता है .

प्रज्ञ व्यक्ति जानता है कि हँसना ,अहंकार रहित है .जब व्यक्ति आध्यात्मिक दौलत इकट्ठी कर लेता है तो वो धार्मिक हो जाता है ,जिसका अर्थ है -जीवन का आनंद लेना .पर इसका अर्थ ये नहीं है कि लोगों के विचारों पर हँसना.

जिस प्रकार एक बच्चे की हंसी ,उसके भीतर से आती है ,शुद्ध होती है ,उसी प्रकार ,प्रज्ञ व्यक्ति भी जानता है कि व्यक्ति को,अपने सम्पूर्ण जीवन में,मुस्कुराते रहना चाहिए .यदि व्यक्ति,प्रत्येक अवस्था में,मुस्कुराता रहेगा तो वो प्रत्येक अवस्था का सफलतापूर्वक सामना कर पायेगा .

इस प्रकार ,व्यक्ति,हँसता -मुस्कुराता और जीवन की प्रत्येक अवस्था का सामना करता हुआ ,प्रसन्नतापूर्वक ,जीवन बिताता है .