HOW TO LIVE LIFE:14

Do not be affected by criticism: –

Many times, when we put our opinions or thoughts on any topic or do some work, then we see that some people are criticizing the work done by us and our thoughts and opinions. It is natural. Each person has his own Thinks and they think in the same way.

It is very easy to criticize anybody but when the criticisms of self are coming, then only a few knows the art of tackling it. Criticism can make the person vulnerable and can hurt his self-confidence also. As well as this can also take a person to think like a person who is criticizing and the person starts to walk on the same path and think of himself as disdainful. Sometimes this feeling give place to fear and anger in the heart which kills the goodness which is inside the person.

The person should neither criticize anyone nor should take his own criticism in the wrong way. The criticism by the person should be rational and fair, not because of personal differences. At the same time, he does not have any right to criticize the subject which the person does not understand. Such criticism further enhances the distance between criticizer and the one who faces the criticism. The only purpose of criticism is to make any person or her thoughts better. It should be done to make him best.

But if a person criticizes others, then he should have the power to face criticism in himself and at the same time if he criticizes someone, then there should be a sense of helping him.

The criticism taken in the right sense encourages the person, either to improve the criticizer or encourages to improve criticizer’s thoughts, or provides an opportunity to improve the disorders within himself.

One of the best ways to make your actions, opinions and ideas better is that the person has learned to criticize himself without any bias. Thus, the person can not only avoid criticism of others, but by understanding the shortcomings in self, can overcome them. Thus, by becoming great person he can eliminating criticisms. By doing this, the individual’s confidence can increase manifolds and he can attain a strong mental state .

An impartial thinking, optimistic thinking and never give up attitude, is the fundamental element to fight any criticism. All the great men of the world have faced criticism at different stages of life but they, without being influenced by all these, Giving up there best. And are called great. Therefore, the person should learn from them without being impressed by the criticisms, and should continue to give their best, so that not only can he become great, but could also be able to improve the country and the world.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

जीवन कैसे जीयें:

आलोचनाओं से प्रभावित न हों:-

अनेकों बार,जब हम किसी विषय पर अपनी राय या विचार रखते हैं अथवा कोई कार्य करते हैं तो देखते हैं कि कुछ व्यक्ति हमारे द्वारा किये गए कार्यों की और हमारे विचारों और राय की आलोचना कर रहे हैं।ऐसा स्वाभाविक है।प्रत्येक व्यक्ति की अपनी सोच होती है और वो उसी हिसाब से सोचता है।

किसी की भी आलोचना करना बेहद आसान होता है पर जब स्वयं की आलोचना हो रही हो तो उससे निबटने की कला कम ही लोगों को आती है।आलोचना व्यक्ति को उत्साहहीन कर सकती है और उसके आत्मविश्वास को भी नुक्सान पहुंचा सकती है।साथ ही साथ ये व्यक्ति को आलोचना करने वाले व्यक्ति की ही भांति सोचने और उस के ही रास्ते पर चलने और स्वयं को हेय सोचने की दिशा में भी ले जा सकती है।कभी-कभी मन में भय और क्रोध की भावना को भी जगह दे देती है जो व्यक्ति के अन्दर की अच्छाई को मार डालती है।

व्यक्ति को न तो किसी की गलत आलोचना करनी चाहिए और न ही स्वयं की आलोचना को गलत अर्थों में लेना चाहिए।व्यक्ति द्वारा की गयी आलोचना तर्कसंगत और निष्पक्ष होनी चाहिए न कि व्यक्तिगत मतभेदों के कारण।साथ ही साथ जिस विषय को व्यक्ति समझता नही है उस पर आलोचना करने का उसे कोई अधिकार नही होता।इस तरह की आलोचना आलोचना करने और सहने वाले की दूरी को और बढ़ा देती है।आलोचना का एकमात्र उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को अथवा उसके विचारों को बेहतर कर उसे उत्तम बनाना होना चाहिए।

पर यदि व्यक्ति दूसरों की आलोचना करता है तो उसके अन्दर खुद की आलोचना सहने की शक्ति भी होनी चाहिए और साथ ही साथ यदि वो किसी की आलोचना करता है तो उसकी मदद करने का जज्बा भी होना चाहिए।

सही अर्थों में ली गयी आलोचना या तो व्यक्ति को आलोचना करने वाले व्यक्तियों को अथवा उनके विचारों को सुधारने के लिए प्रोत्साहित करती है या स्वयं के भीतर के विकारों को सुधारने का अवसर प्रदान करती है।

अपने कार्यों,राय और विचारों को उत्तम बनाने का सबसे बेहतर उपाय है कि व्यक्ति स्वयं की आलोचना करना सीखे और वो भी बिना किसी पक्षपात के।इस प्रकार व्यक्ति न केवल अन्यों की आलोचना से बच सकता है बल्कि अपने अन्दर की कमियों को जानकर उन्हें खुद ही दूर कर सकता है।इस प्रकार एक उत्तम व्यक्ति बन कर आलोचनाओं को समाप्त कर सकता है।ऐसा करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास दोगुना हो कर उसकी मानसिक स्थिति मजबूत हो जाती है।

एक निष्पक्ष सोच,आशावादी और कभी न हार मानने वाला रवैया,किसी भी आलोचना से लड़ने के लिए मूलभूत तत्व हैं।जीवन के विभिन्न पड़ावों पर विश्व के सभी महान व्यक्तियों ने आलोचनाओं का सामना किया है पर वे इन सब से प्रभावित हुए बिना अपना बेहतर देते रहे और महान कहलाये।अत: व्यक्ति को इन से सीख ले कर आलोचनाओं से प्रभावित हुए बिना अपना बेहतर देते रहना चाहिए ताकि आगे चल कर न केवल वे महान बन सके अपितु अपने देश और संसार को भी बेहतर बना सके।