HOW TO LIVE LIFE:15

Accept yourself, feel good about yourself and don’t try to be a transcript of anyone else.:

When a person, take his criticism in the wrong sense, then he starts thinking negative and wrong about himself. He becomes victim of fear and anger and a negativity surround him.

Many people are living a very good life but even then, they are not content and not in peace. This is because due to other’s criticism or looking at others they have lost their confidence. They start thinking to become like others.

But, when person start thinking like that, then he starts losing his happiness and starts fearing being assessed. But, he should not lose his confidence just by looking at others or due to others criticism. He should not try to be a transcript of anyone else.

The person will have to be true to himself. Nobody can be perfectly perfect and cannot live up to the expectations of the others.

The most important thing is that what the person feels himself. Therefore, without fear of criticism of anyone, the person will have to see what he is and how can he become better. Instead of becoming someone’s copy, he should try in the direction of becoming a better edition of himself.

To enjoy happiness and peace, the person will have to accept himself. Without fear of what people think about him. He should think good about himself, only then, goodness will come in his life.

The universe is merely the reflection of the thoughts and feelings of people. Whatever people think, comes back to them, in the form of events and people.  Even though many people do hard work, but despite this they do not taste the taste of success.

No one can be best. Maybe the thoughts of the critic should not be right and the person is thinking of becoming like them by being influenced by them in vain. Therefore, by weighing any criticism on the scales of his own discretion should work.

Being worried by criticism, instead of becoming a copy, one should think positively about himself. He should save himself from entering bad feelings in mind. By looking at the positive aspects of those criticisms, without becoming anyone’s copy, there is a need to think about making yourself better. But no bad thoughts or feelings should be allowed in the mind.

When people will accept themselves openly, without being distracted from criticism, they will keep good feelings about themselves and others, there is no doubt that goodness and excellence in the form of reward will come in their lives.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

जीवन कैसे जीयें:

स्वयं को स्वीकारें,अपने बारे में अच्छा महसूस करें और किसी की प्रतिलिपि बनने  की न सोचें:

जब व्यक्ति स्वयं की आलोचनाओं को गलत अर्थ में ले लेता है तो वह स्वयं के बारे में गलत और नकारात्मक सोचने लग जाता है।वह भय और क्रोध का शिकार हो जाता है और नकारात्मकता उसे घेर लेती है।

कई व्यक्ति एक अच्छी जिन्दगी जी रहे होते हैं लेकिन फिर भी संतुष्ट और शान्ति से नहीं रहते।ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अन्यों को देख कर या उनकी आलोचनाओं से घबरा कर अपना आत्मविश्वास खो देते हैं और उन जैसा बनने की सोचने लगते हैं।

पर जब व्यक्ति ऐसा सोचने लगता है तो अपनी ख़ुशी खो देता है और आंके जाने का भय उस पर हावी हो जाता है।पर व्यक्ति को दूसरों को देख कर या उनकी आलोचनाओं से घबरा कर स्वयं पर से विश्वास नहीं खोने देना चाहिए और किसी अन्य की प्रतिलिपि बनने का नहीं सोचना चाहिए।

व्यक्ति को स्वयं के प्रति सच्चा रहना होगा।कोई भी सम्पूर्ण रूप से उत्तम नहीं हो सकता और न ही लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा उतर सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति स्वयं क्या महसूस करता है।इसलिए किसी की भी आलोचना से घबराये बिना व्यक्ति को यह देखना होगा कि वह क्या है और कैसे बेहतर बन सकता है।उसे किसी और की प्रतिलिपि बनने की बजाय स्वयं का एक उत्तम संस्करण बनने की दिशा में प्रयत्न करना चाहिए।

ख़ुशी और शान्ति का आनन्द लेने के लिए व्यक्ति को स्वयं को स्वीकारना होगा।बिना इस बात का भय किये कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं।व्यक्ति को स्वयं के बारे में अच्छा सोचना होगा तभी उसके जीवन में अच्छाई आएगी।

ब्रह्मांड व्यक्तियों के विचारों और भावनाओं का प्रतिबिम्ब मात्र है।व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा ही घटनाओं और व्यक्तियों के रूप में उसके पास आ जाता है।अनेकों लोग काफी मेहनत करने के बावजूद,इसी कारण से सफलता का स्वाद नहीं चख पाते।

कोई भी व्यक्ति उत्तम नहीं हो सकता।हो सकता है आलोचना करने वाले के विचार ही सही न हों और व्यक्ति  व्यर्थ में उन से प्रभावित हो कर उन जैसा बनने की सोच रहा हो।इसलिए किसी भी आलोचना को अपने विवेक के तराजू पर तोल कर ही कार्य करना चाहिए।

आलोचनाओं से घबरा कर किसी की भी प्रतिलिपि बनने की बजाय व्यक्ति को अपने बारे में सकारात्मक सोचना चाहिए,मन में बुरी भावनाओं को घुसने से खुद को बचाना चाहिए।उन आलोचनाओं के सकारात्मक पहलुओं पर नजर डाल कर बिना किसी की प्रतिलिपि बने,खुद को और बेहतर बनाने का सोचना चाहिए।पर कोई भी बुरा विचार या भावना मन में नहीं आने देनी चाहिए।

जब व्यक्ति आलोचनाओं से विचलित हुए बिना उन्हें खुले दिल से स्वीकारेंगे,खुद के बारे में और अन्यों के बारे में अच्छी भावनाएं रखेंगे तो कोई शक नहीं है कि प्रतिफल के रूप में अच्छाई और उत्तमता उनके जीवन में न आये।