HOW TO LIVE LIFE:16

Look up within self:1

When a person meditates by sitting in solitude, then he can hear the inner voice. In fact, peeping inside is the best way to remove inner disorders. Simultaneously, only the voice of his soul can guide him in the best possible way. Therefore, the person should peek within himself.

If the person’s attention is focused only on external objects, external activities, external beauty, then how will he hear the inner voice itself? It can be understood by a story.

Once, a person, while working at a Stable, lost his watch in a large pile of grass that was there. The watch was very dear to him and he wanted to get him back at any cost. But after doing a lot of research, could not find the clock.

Then he thought of taking the help of a group of children playing outside the Stable. He prayed to find that watch. The children searched the heap of grass, but they failed. They returned tired and returned.

Now the person thought of not finding the clock after accepting defeat. But then a child returned there again and said that if that person allows him to come in once again, then he is hoping that he will find the watch.

Seeing the firmness of the child’s voice, he gave the child another chance. The child returned with a clock in a while. Then the person of that stables asked the child the reason for his success. That kid said that he sat quietly without making any noise and in that silence, he heard the tick of the clock and then only he found that clock.

The person’s life is consistent with this story. The voice within the person also guides the person in life, just like the ticking of the clock. But the person is immersed in outer beauty and noisy and filled with sophistication, thus cannot hear the inner voice of his soul.

The person needs to turn his thoughts into the inner circle. Only by doing so will the person find the right answer hidden within himself, who will guide him in every area of life.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

जीवन कैसे जीयें:

स्वयं के भीतर झांकें:१

जब व्यक्ति एकांत में बैठ कर ध्यान करता है तो वो अपने भीतर की आवाज सुन पाता है।वास्तव में स्वयं के भीतर झाँक कर देखना ही भीतर के विकारों को दूर करने का उत्तम उपाय है।साथ ही साथ व्यक्ति की आत्मा से निकली आवाज ही उसका सच्चा मार्गदर्शन कर सकती है।अत: व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकना चाहिए।

यदि व्यक्ति का ध्यान प्रतिक्षण बाह्य वस्तुओं,बाह्य क्रियाकलापों,बाह्य सुन्दरता पर ही लगा रहेगा तो वो स्वयं के भीतर की आवाज कैसे सुनेगा।इसे एक कहानी द्वारा समझा जा सकता है।

एक बार एक व्यक्ति ने अस्तबल में काम करते वक्त अपनी घडी वहां पड़े घास के एक बड़े ढेर में गुमा दी।वो घडी उसे बहुत प्रिय थी और वो उसे किसी भी कीमत पर वापस पाना चाहता था।पर काफी खोज करने के पश्चात भी वो उस घडी को ढूंढ नहीं पाया।

तब उसने अस्तबल के बाहर खेल रहे बच्चों के एक समूह का सहयोग लेने की सोची।उसने उन से वो घडी ढूंढ देने की प्रार्थना की।बच्चों ने उस घास के ढेर को छान डाला पर उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी।वे थक कर लौट गए।

अब उस व्यक्ति ने हार मान कर घडी को न ढूँढने की सोची।पर तभी वहां एक बच्चा दोबारा लौटा और कहा कि यदि वो व्यक्ति उसे एक बार फिर से भीतर जाने दे तो उसे उम्मीद है कि वो घडी को ढूंढ लेगा।

उस बच्चे की आवाज की दृढ़ता देखकर उसने बच्चे को दूसरा मौका दे दिया।बच्चा कुछ ही देर में उसकी घडी ले कर लौट आया।तब उस अस्तबल के व्यक्ति ने उस बच्चे से उसकी सफलता का कारण पूछा।उस बच्चे ने कहा कि वह बिना शोर मचाये चुप-चाप बैठ गया और उस नीरवता में उसे घड़ी की टिक-टिक की आवाज सुनाई दी और तब वह घडी खोज पाया।

इस कहानी के अनुरूप ही व्यक्ति का जीवन होता है।व्यक्ति के भीतर की आवाज भी घडी की टिक-टिक की ही भांति जीवन में व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है।पर व्यक्ति बाहरी सौन्दर्य और शोरगुल में डूबा हुआ और कुतर्कों से भरा हुआ उस आवाज को सुन नहीं पाता।

जरूरत है व्यक्ति अपनी विचार धारा को भीतर की ओर मोड़े।केवल ऐसा कर के ही व्यक्ति स्वयं के भीतर छुपे सही उत्तर को खोज पायेगा जो उसका,जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन करेगा।