HOW TO LIVE LIFE:BE HAPPY & SPREAD HAPPINESS:1

जीवन कैसे जीयें:खुश रहें और ख़ुशी फैलाएं :१

ख़ुशी प्राप्त करने के लिए हमें भौतिकता से दूर रहना होगा और अपने मस्तिष्क को सुदृढ़ करना होगा .ख़ुशी प्राप्त करने के लिए हमें अपने लक्ष्य को भी सरल रखना होगा .अपने-अपने दृष्टिकोण के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की ,ख़ुशी के बारे में अपनी-अपनी व्याख्या हो सकती है.

ख़ुशी एक मानसिक अवस्था है और जब हम अपनी अवस्था से ,सहज महसूस करते हैं ,तो हमें आनंद की अनुभूति होती है .

आनंद की अनुभूति के लिए हमें किसी भी कार्य में पूरी तन्मयता के साथ लगना  होगा.जब व्यक्ति पूरी तरह से ,किसी विशेष कार्य या प्रयोजन में लग जाता है तो उसे अन्य किसी बात का ख्याल नहीं रहता और उसे आनंद प्राप्त होने लगता है.

इस प्रकार ,जब व्यक्ति ,किसी सकारात्मक विचार पर केन्द्रित होता है ,तो जाने-अनजाने ,वो उस परम पिता परमेश्वर से जुड़ जाता है ,जिसकी परिणिति आनंद के रूप में होती है.

सच्चा आनंद तब भी प्राप्त हो सकता है ,जब व्यक्ति ,किसी भी भौतिक वस्तु से,व्यक्ति के प्रति आसक्त न हो.अथवा किसी भी विचार से मोहित न हो.

क्योंकि ,जहाँ मोह होता है,आसक्ति होती है ,वहाँ उम्मीद भी हो सकती है.और जरूरी नहीं है कि सारी की सारी उम्मीदें वास्तविक हों.

ज्यादातर आसक्ति (मोह) ,हमारी इच्छाओं के कारण होती हैं.जब व्यक्ति,किसी वस्तु या विचार की इच्छा रखने लगता है तो उससे सम्बन्ध महसूस करने लगता है .

भौतिक संपत्ति ,व्यक्ति को एक तरह की सुरक्षा की भावना देती है.कभी-कभी डर की वजह से भी ,वस्तुओं की चाह होने लगती है .भौतिक संपत्ति ,पैसे को ही व्यक्ति अपनी ख़ुशी का कारण मान लेता है .यद्यपि ,पैसे से व्यक्ति ,केवल ,भौतिक सुख-सुविधाएं ही प्राप्त कर सकता है ,पर भौतिक संपत्ति ,पैसे से लगाव ,व्यक्ति को शाश्वत ख़ुशी नहीं दे सकता .

ख़ुशी का एहसास ,व्यक्ति को तब होता है ,जब व्यक्ति के भीतर ,दुःख और कष्ट का एहसास ,ख़त्म होने लगता है.जब व्यक्ति अपने मस्तिष्क को ,ध्यान और समाधि आदि के द्वारा,इतना शक्तिशाली कर लेता है और भौतिक इच्छाओं से परे होकर ,केवल परमात्मा पर ध्यान केन्द्रित करता है ,तो उसे,ठीक-ठाक होने और समस्त बाधाओं एवम् संघर्ष से ,छूटने का एहसास होने लगता है,और, वह ,सभी संघर्षों ,टकरावों को सुलझा कर,खुद के साथ ,प्रसन्नता से रह सकता है.

इस प्रकार, अपने मस्तिष्क को मजबूत कर,व्यक्ति,हमेशा ,शांत,प्रसन्न और भावनात्मक रूप से संतुष्ट जीवन जी सकता है.

आजकल,व्यक्ति ,शान-ओ शौकत से जीना चाहता है और सोचता है कि असली ख़ुशी ,ताकत,पैसे और प्रसिद्धि से आती है या नयी-नयी ,भौतिक वस्तुओं को प्राप्त करने से .

पर ,वास्तव में ,ये भौतिक वस्तुएं,असली ख़ुशी को प्राप्त करने की राह में रोड़ा हैं.इनके द्वारा प्राप्त खुशियाँ क्षणिक हैं .पर असली ख़ुशी,जिसकी तलाश में व्यक्ति ,भटकता रहता है,उसे नही मिलती .व्यक्ति ,भौतिक चाह में ,भटकता रहता है और व्यक्ति ,चिंता,निराशा औत तनाव का शिकार हो जाता है .इस प्रकार सदा अप्रसन्न रहता है.

पर ,जब व्यक्ति अपनी आसक्ति को त्यागता है और सभी भौतिक और नाशवान वस्तुओं,विचारों से अलगाव की भावना रखने लगता है ,तब उसके जीवन में आनंद का संचार होने लगता है और व्यक्ति सच्ची ख़ुशी महसूस करने लगता है .