HOW TO LIVE LIFE: DO NOT AFRAID OF FEAR

Anytime in life, when we want to do something new or want to take any first step in life, then the fear of one kind has been dominated on  us which prevent us from taking that step or doing something new .But on the other hand, this fear becomes an inspiration to do some adventurous and bold.

It depends on us that we accept the prayer of that fear and live life on the old path or by taking inspiration from that fear, and do something new and thrilling.

History is full of fearless and brave fighters and is full of the conquerors. However, it is not necessary that they never be scared of within. The fear is a human emotion, which is naturally in every conscious.

There is no need to be ashamed from fear because at some or the other point in life, every person is afraid of something or the other.

Fear is good because it activates the process of fighting or fleeing within the person, so that the person can escape from danger. This warns the person about how things can go wrong.

On the other hand, this fear, prevent the person from finding his hidden capacity, which can lead the person to the infinite heights of success. This fear generates the wrong feeling of question of self-doubt and self-abilities in the person.

If a person knees down in front of his fear, then he will never be able to grow. However, if he encounters them, they will not be able to stop him.

The world, remembers the brave people only for their bravery. Not for their victory or defeat, but how they made the path from within fear, for that matter.

Often, the person does not want to face his fear, in order that he can escape his failure or embarrassment. However, in this way he defeats himself without fighting.

When a person start defeating his fear, then he knows that, his price is much more than what he thought. So be brave and see how life changes.

HINDI TRANSLATION-हिंदी अनुवाद

जीवन कैसे जीयें:डर से न डरें

जीवन में कभी भी,जब हम कुछ नया करना चाहते हैं या जीवन में कोई प्रथम कदम उठाना चाहते हैं,तो एक तरह का डर हमारे ऊपर हावी हो जाता है जो हमें उस कदम को लेने या कुछ नया करने से रोकने की,उससे अलग होने की प्रार्थना करता है,पर वहीँ दूसरी और यही डर कुछ साहसिक करने,कुछ रोमांचकारी करने का प्रेरणा-सोत्र भी हो जाता है।

ये हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम उस डर की प्रार्थना स्वीकार कर पुराने ढर्रे पर जिन्दगी जीते रहें अथवा उस डर से प्रेरणा ले कर कुछ नया और रोमांचकारी करें।

इतिहास डर-विहीन और बहादुर लड़ाकों से और विजेताओं से भरा पड़ा है।पर ये जरूरी नहीं है कि उनके अन्दर कभी, डर नहीं आया हो।डर एक मानवीय भावना है जो स्वाभाविक रूप से प्रत्येक चेतन में होती है।

डर से शर्माने की जरूरत नहीं होती क्योंकि जीवन के किसी न किसी अवसर पर,प्रत्येक व्यक्ति,किसी न किसी बात से डरता ही रहता है।

डर इसलिए अच्छा है क्योंकि ये व्यक्ति के भीतर लड़ने अथवा पलायन करने की प्रक्रिया को सक्रिय करता है,ताकि व्यक्ति खतरे से बच सके।ये व्यक्ति को आगाह करता है कि किस तरह से चीजें गलत जा सकती हैं।

पर वहीँ,डर,व्यक्ति को,अपनी छिपी हुई क्षमता को खोजने से,रोक भी लेता है,जो,व्यक्ति को सफलता की अनंत ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।ये व्यक्ति में आत्म-संदेह करने और खुद की क्षमताओं के प्रति,प्रश्न करने की गलत भावना भी पैदा कर सकता है।

यदि व्यक्ति अपने डर के आगे घुटने टेक देगा,तो वो कभी भी विकसित नहीं हो पायेगा।पर वहीँ,यदि वो इनका डट कर सामना करेगा तो उसे कोई भी रोक नहीं पायेगा।

बहादुर लोगों को,जगत,उनकी बहादुरी के लिए ही याद रखता है।उनकी जीत या हार के लिए नहीं,बल्कि उन्होंने डर के भीतर से कैसे रास्ता बनाया,उस बात के लिए।

अक्सर व्यक्ति,अपने डर का सामना,इसलिए नहीं करता कि अपनी असफलता अथवा शर्मिंदगी से बच सके।पर इस तरह वो बिना लडे ही हार जाता है।

जब व्यक्ति अपने डर से पार पाने लगता है,तब उसे ज्ञात होता है कि उसकी कीमत,जितना वो सोचता था,उससे कहीं ज्यादा है।इसलिए बहादुर बनें और देखें,जीवन किस प्रकार बदलता है।