How to live life:To be successful:

Nobody become successful on its own. Success needs a prudent plan and needs to remain firm on that plan. It sounds easy to say and hear, but it is very necessary to be committed for it. It is not very difficult to do this, but to do this, hard work is required. Nevertheless, if the person starts making a commitment once, then the results begin immediately. The biggest miracle of successful life is that the small step taken in the direction of success attracts more success.

See yourself in the mirror. The person who stare you from the other side of the mirror, only he is responsible for your success. Means, none other than you can takes credit for your success, and in the same way, you cannot blame others for your shortcomings. A successful person is the one who takes the full responsibility of his actions.

When one will keep himself happy, will keep himself optimistic, will keep progressive thinking, then no one can stop him from being successful .If you think that you have nothing on which you will be happy, then also, do Smile! Because by doing this there will be abundance of positive thoughts in life, which shoo away the negative thoughts in the life, which are the main factors for failure in life. Whenever you smile, you will find that negative thoughts barely born within you.

One should always feel good about himself. He should feel good about self-worth. He should feel good about his accomplishments and abilities. By not taking his mistakes on his heart, one should learn from them. At the same time, one should keep reminding himself his accomplishments and praise himself for them. Congratulate yourself for taking positive action towards a successful future. Be a positive self-respect. Keep it. When you respect yourself, only then will you succeed in life and others will respect you.

The person should know about the successful people. When he has many options, he should choose the option that a successful person has chosen or might chooses. Meaning, the person should get the closeness of successful people.

Try to avoid the unsuccessful people as they are surrounded by negative energy and you can fail by coming into the influence of that energy. Therefore, do not try to connect with them in any situation. The negative person only knows how to destroy. He does not know how to make it. They gradually absorb all positive energy from within you. Whether you try to raise them and take them out of their situation, but they will not be able to lift themselves as fast as they will pull you down. One should always stay away from people of all types of negative thoughts, like blaming others, complaining others.

You should always try to do the things in which you are better and which gives you satisfaction. There is no benefit from doing such a task, which is discouraging, boring, or unrepentant. Because you cannot succeed by doing such works.

You should make a blueprint of how you want to live your life, and you should always behave in such a way that you feel like seeing or wanting every day.

Set your greatest goal. Repeat your goal every day in a loud voice. Tell your friends about your goals. Prepare a plan to reach your goals and then stick to your plans.

Discuss with the positive people how they succeeded. See good books, movies, etc. Those who are positive. Fill your mind with positive things and give yourself a positive respect.

Never accept defeat. We lost the battle of life the same moment when we stop trying. Keep on trying. One-day success will definitely be yours.

Remember, Fear of failure, uncertainty, feeling of insecurity, low self-confidence, confusion, depression, anxiety, guilt feelings are in every man who are the main factors of failure. Only that person is successful, who by doing positive works, sticking to his plans, while preserving his vision for the future, and learn from his mistakes and failures and control his temporary feelings. And this is the original mantra of success.

HINDI TRANSLATION:

जीवन कैसे जीयें:सफल होने के लिए:

कोई भी व्यक्ति अपने आप सफल नहीं होता।सफलता को चाहिए एक विवेकपूर्ण योजना और फिर उस योजना पर अडिग रहना।ये कहने,सुनने में तो आसान लगता है किन्तु इसके लिए प्रतिबद्ध होना बहुत जरूरी है।ऐसा करना बहुत मुश्किल नहीं है किन्तु इसके लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता है।पर यदि व्यक्ति प्रतिबद्ध हो कर एक बार शुरुआत कर देता है तो नतीजे आना तुरंत शुरू हो जाते हैं।सफल जीवन का सबसे बड़ा चमत्कार यही है कि सफलता की दिशा में उठाया छोटा सा कदम अधिक सफलता को आकर्षित करता है।

अपने आप को आईने में देखें।जो व्यक्ति आपको दूसरी और आप को घूरता पायेगा वही आपकी सफलता के लिए जिम्मेदार है।अर्थात् सिवाय आपके खुद के कोई अन्य आप की सफलता का श्रेय नहीं ले सकता और उसी प्रकार आप अपनी कमियों के लिए किसी अन्य को दोषी नहीं ठहरा सकते।एक सफल व्यक्ति वही होता है जो अपने किये गए कृत्यों की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले।

जब व्यक्ति स्वयं को प्रसन्न,आशावादी रखेगा और आगे की सोच रखेगा तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।यदि आप सोचते हैं कि आप के पास ऐसा कुछ नहीं है जिस पर आप प्रसन्न हो सकें,तो भी मुस्कुराइये।क्योंकि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक विचारों की बहुतायत होती है जो जीवन में आये नकारात्मक विचारों को, जो असफल होने के प्रमुख घटक हैं ,जीवन से भगा देता है।जब भी आप मुस्कुराएंगे तो पायेंगे कि नकारात्मक विचार बमुश्किल आपके भीतर जन्म ले रहे हैं।

हमेशा स्वयं के बारे में,स्वयं की काबीलियत के बारे में ,स्वयं की उपलब्धियों और क्षमताओं के बारे में अच्छा महसूस करना चाहिए।अपनी गलतियों को दिल से न लगाते हुए उन से सीखें।साथ ही साथ अपनी पिछली उपलब्धियों को याद दिलाएं और उनके लिए खुद की प्रशंसा  करें।खुद को एक सफल भविष्य की ओर सकारात्मक कदम लेने के लिए मुबारकबाद दें।अर्थात् एक सकारात्मक आत्मसम्मान बनाये रखें।जब आप स्वयं का सम्मान करेंगे तभी जीवन में सफल हो पायेंगे और अन्य भी आप का सम्मान करेंगे।

आप संसार में किसी उद्देश्य से आये हैं।अत: उस उद्देश्य की खोज करें और उस की पूर्ति की दिशा में प्रयत्न करें।अर्थात् कभी ये न सोचें कि आप व्यर्थ हैं।हमेशा अपने आप पर यकीं बनाये रखें।

हमेशा व्यक्ति को खुद को यह एहसास दिलाते रहना चाहिए कि वह सफल होगा।उसे हमेशा सफल होने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा अर्थात् व्यक्ति के भीतर सफल होने की भूख और चाह रहनी चाहिए तभी वो सफल हो सकता है।

व्यक्ति को सफल लोगों के बारे में जानना चाहिए।जब उसके पास अनेकों विकल्प हों तो उसे वह विकल्प चुनना चाहिए जो कि एक सफल व्यक्ति ने चुने हों या वह चुनता।अर्थात् व्यक्ति को सफल लोगों का सानिध्य प्राप्त करना चाहिए।

असफल लोगों से बचने का प्रयत्न करना चाहिए।असफल लोग नकारात्मक ऊर्जा से घिरे होते हैं और उस ऊर्जा के प्रभाव में आ कर आप भी असफल बन सकते हैं।अत: किसी भी परिस्थिति में उन से जुड़ने का प्रयत्न न करें।नकारात्मक व्यक्ति केवल नष्ट करना जानते हैं बनाना नहीं।ये धीरे धीरे आप के भीतर से समस्त सकारात्मक ऊर्जा सोख लेते हैं।चाहे आप उन को उठाने की और उन्हें उनकी स्थिति से बाहर निकालने की कितनी भी कोशिश करें पर वे जितनी जल्दी से आप को नीचे खींच लेंगे आप उतनी तेजी से उनको उठा नहीं पायेंगे।सभी तरह के नकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों जैसे दूसरों को दोष देने वाले ,हमेशा शिकायत करने वाले व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए।

हमेशा वो करने का प्रयत्न करना चाहिए जिसमें आप बेहतर हों और जिसको करने से आप को संतुष्टि मिलती हो।ऐसे कार्य जो हतोत्साहित करने वाले,उबाऊ ,अथवा अप्रतिष्ठित करने वाले हों,में लगे रहने से कोई फायदा नहीं है।क्योंकि ऐसे कार्य कर के आप सफल नहीं हो सकते।

आप अपना जीवन किस प्रकार से जीना चाहते हैं,इसका एक खाका बना लेना चाहिए और नित्य प्रतिदिन जैसा हम दिखना या बनना चाहते हैं महसूस कर उस तरह से व्यवहार करना चाहिए।

अपना सबसे बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें।प्रतिदिन अपने लक्ष्य को तेज आवाज में दोहरायें।अन्यों को अपने लक्ष्य के बारे में बताएं।अपने लक्ष्य तक पहुँचने की योजना तैयार करें और उस पर टिके रहें।

सकारात्मक लोगों से विचार-विमर्श करें कि वे कैसे सफल बने।अच्छी-अच्छी किताबें,चलचित्र आदि देखें जो सकारात्मक हों।सकारात्मक बातों से अपने मस्तिष्क को भरें और खुद को सकारात्मक सम्मान देते रहें।

कभी भी हार न मानें।हम उसी क्षण हार जाते हैं जब हम प्रयास करना छोड़ देते हैं।प्रयास करते रहें एक दिन सफलता जरूर हाथ लगेगी।

 

ध्यान रखें ,असफलता का डर,अनिश्चितता,असुरक्षा की भावना,कम आत्मविश्वास,असमंजस की स्थिति,अवसाद,घबराहट,शर्मिंदगी की भावनाएं हरेक मनुष्य में होती हैं जो असफलता का मूल कारण हैं पर सफल व्यक्ति वही है जिसने इन अस्थाई भावनाओं को, सकारात्मक कार्यों से ,अपनी योजनाओं पर अडिग रहते हुए ,भविष्य के बारे में अपने नजरिये को बनाये रखते हुए ,अपनी गलतियों और असफलताओं से सीखते हुए और स्वयं को अपने लक्ष्य का पीछा करने के लिए पुन:-पुन: समर्पित करते हुए ,काबू में कर लिया है।और यही सफलता का मूल मन्त्र है।