PONDERABLE:49 – CRISIS MANAGEMENT

If they are disgusted with crises, they grow up. -Edmund Burke

VIZ If we get scared by the crises & scared of facing them and hates them, then how can we overcome them. They can be destroyed gradually by facing the crisis. If we continued to avoid them, then one day it will come, when they will be looked huge by us.

Crises only improves our character and provide ethical force. -Samuel Smiles

VIZ If everything is good in our lives, then where will the courage to fight with the crises within us? When we face the crisis, then our character will be exposed and shined. The real test of our character is only at the time of the crisis. When we are battling the crisis, our character develops and nourishes the moral force inside us which helps us fight the crisis.

Holding patience in times of crisis is like winning half the battle. -Platas

VIZ Do not scare at the time of crisis. If we get scared by the crisis, then our power to understanding & thinking will cease. As soon as our power to understand & think ceases, we kneel in front of the crisis and thus lose our fight against it. The person who does not scare in crisis and retains his patience, he gets the strength to fight against him and because of his discretion and moral force, can win half the battle based on his patience.

Patience and religion are tested only in the crisis. -Premchand

VIZ The person who does not lose his patience at the time of the crisis can overcome the crisis. Many people are scared of the crisis and lose their patience and then they start adopting the wrong way to deal with that crisis. But some People maintain their patience and adopt a proper route to recover from that crisis. It has been said that patience and religion are tested only in the crisis.

The jitter in trouble is the biggest trouble.

VIZ The person who gets nervous in trouble, he accepts defeat in the middle and leaves an attempt to overcome that problem. Thus, he can never come out of that trouble. That is to say that the jitter in trouble is the biggest trouble.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

विचारणीय:४९ – संकट प्रबंधन

संकटों से घृणा की जाय तो वे बड़े हो जाते हैं।-एडमंड बर्क

अर्थात् यदि हम संकटों से घबराएंगे,उनका सामना करने से डरेंगे और उन से घृणा करेंगे तो उन से पार कैसे पायेंगे।संकटों का सामना करने से ही वो धीरे-धीरे नष्ट हो सकते हैं।यदि हम उनसे बचते ही रहेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि वे हमें बहुत बड़े लगने लगेंगे।

संकट ही चरित्र को निखार कर नैतिक बल प्रदान करते हैं।-सैमुअल स्माइल्स

अर्थात् यदि हमारे जीवन में सब कुछ अच्छा ही अच्छा हो तो हमारे भीतर संकटों से लड़ने का हौसला कहाँ से आएगा।जब हम संकटों का सामना करते हैं तब ही हमारा चरित्र निखर कर सामने आता है।हमारे चरित्र की असली परीक्षा संकट के समय ही होती है।जब हम संकट से जूझते हैं तब ही हमारे चरित्र का विकास होता है और हमारे भीतर नैतिक बल का पोषण होता है जो संकटों से लड़ने में हमारी मदद करता है।

संकट के समय धीरज धारण करना ही मानो आधी लड़ाई जीत लेना है।-प्लाटस

अर्थात् संकट के समय कभी भी घबराना नहीं चाहिए।यदि हम संकट से घबरा जायेंगे तो हमारी सोचने समझने की शक्ति ख़त्म हो जायेगी।सोचने समझने की शक्ति नष्ट होते ही हम संकट के सामने घुटने टेक देते हैं और इस प्रकार उसके खिलाफ अपनी लड़ाई हार जाते हैं।जो व्यक्ति संकट से घबराता नहीं और अपना धीरज बनाए रखता है वो उसके खिलाफ लड़ने की शक्ति जुटा पाता है और अपने विवेक और नैतिक बल के कारण आधी लड़ाई तो धीरज धरते ही जीत जाता है।

संकट में ही धैर्य और धर्म की परीक्षा होती है।-प्रेमचंद

अर्थात् संकट के समय जो व्यक्ति अपना धैर्य नहीं खोता वो ही संकट से पार पा सकता है।कई व्यक्ति संकट से घबरा जाते हैं और अपना धैर्य खो देते हैं और फिर वो उस संकट से निबटने के लिए गलत रास्ते अपनाने लग जाते हैं।पर वहीँ कुछ लोग अपना धैर्य बनाए रखते हैं और उचित मार्ग अपनाते हुए उस संकट से उबर जाते हैं।इसलिए कहा गया है कि संकट में ही धैर्य और धर्म की परीक्षा होती है।

मुसीबत में घबराना सबसे बड़ी मुसीबत है।

अर्थात् जो व्यक्ति मुसीबत में घबरा जाता है वो बीच में ही हार मान लेता है और उस मुसीबत से पार पाने का प्रयास छोड़ देता है।इस प्रकार वो उस मुसीबत से कभी भी बाहर नहीं आ पाता।कहने का तात्पर्य है कि मुसीबत में घबराना सबसे बड़ी मुसीबत है।