PONDERABLE:41

The coward dies many times before their death; the brave dies only once. -William Shakespeare

VIZ The timid person is victim of fear before doing anything. Because of such fear, he starts doubting everyone. Because of such fear and suspicion, he does not even sleep in the nights, and due to fear, innumerable times he feels like dead.That is why it has been said that the coward dies many times, before his death. The brave person does not have any fear and whatever he does, does with full zeal and faith.In this way, like a coward man, due to fear, he does not die while alive, and dies only at the time of death. The purpose of saying is that we should always spend life with bravery and faith.

We became what our thoughts make us. So, keep in mind what you think. The words are subordinate. Thoughts always remain; They travel far and wide. -Swami Vivekananda

VIZ We become the same as we think. If we will be filled with virtues and think good and true things then we will become gentle and culturable. Then whatever we say, will be full of truth, goodness and thought.But if we bring bad thoughts to mind then we will begin to behave badly and become devil. Then whatever comes out of our mouth, it will be bad. People only remember our good character & good ideas but not our bad thoughts.People remembers the gentleman even after death. Therefore, the words are secondary because they depend on ideas. Our good thoughts go far and people not only adopt them, but due to them, remembers us even after our death.

Do the right thing. It will gratify some people and amaze the rest of them. -Mark Twain

VIZ Make charity, help others, keep up good and true thoughts and be noble. Never mind bad things or do bad to anyone. That is the right thing. When we help others and useful in their good and bad, the needy person will keep a sense of respect and reverence for us and will be grateful to us.At the same time, some people will be amazed by our goodwill, and they may even start doing good work.

Addiction is bad in every form, whether it is alcohol, opium or idealism. – Carl Jung

VIZ As if taken in a small quantity then alcohol and opium can work as medicine, but if taken in excess quantity i.e. to become addict of it may also be deadly, in the same way more idealism than required can also put people in trouble. The person should maintain his goodness and virtues and behave according to the time but not to sit by holding idealism alone.

A fool considers himself wise, but an intelligent person considers himself to be stupid. -William Shakespeare

VIZ The foolish person does not know anything to do but he considers himself as the wise one. That is why he cannot learn anything in life. Because he thinks that he knows everything. Whereas, Wiseman, even after learning so much, still thinks that there remains something to know and learn. That is why he considers himself foolish. It means to say, how much we learn, how much to be wise, we should not be arrogant.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

विचारणीय:४१

डरपोक अपनी मृत्यु से पूर्व असंख्य बार मरते हैं;बहादुर केवल एक बार ही मरता है।-विलियम शेक्सपियर

अर्थात् डरपोक व्यक्ति कुछ भी करने से पूर्व डर का शिकार रहता है।इसी डर के कारण वो हर किसी पर शक भी करने लगता है।इसी डर और शक के कारण उसे रातों को नींद भी नहीं आती और डर के मारे असंख्य बार वो मरे जैसा महसूस करता है।इसी लिए कहा गया है कि डरपोक अपनी मृत्यु से पूर्व असंख्य बार मरता है।वहीँ बहादुर व्यक्ति को कोई डर नहीं होता और वो जो भी करता है पूरे जोश और विश्वास के साथ करता है।इस प्रकार वो डरपोक व्यक्ति की भांति,डर के मारे जीते जी नहीं मरता और केवल मृत्यु के वक्त ही मरता है।कहने का उद्देश्य है कि हमें हमेशा बहादुरी और विश्वास के साथ जीवन बिताना चाहिए।

हम वो हैं जो हमारे विचार हमें बनाते हैं;इसलिए इस बारे में ध्यान रखें कि आप क्या सोचते हैं।शब्द गौण हैं।विचार रहते हैं;वे दूर तक सफ़र करते हैं।-स्वामी विवेकानंद

अर्थात् हम वैसा ही बन जाते हैं जैसा हम सोचते हैं।यदि हम सद्गुणों से भरे रहेंगे और अच्छी और सच्ची बातें विचारेंगे तो हम सज्जन और संस्कारी बन जायेंगे।तब हम जो भी बोलेंगे वह सच्चाई,अच्छाई और सद्विचारों से भरा होगा।पर यदि हम बुरे विचार मन में लायेंगे तो हम बुरा आचरण भी करने लगेंगे और दुर्जन बन जायेंगे।तब हमारे मुँह से जो भी निकलेगा वो बुरा ही होगा।लोग हमारे अच्छे चरित्र,अच्छे विचारों को ही याद रखते हैं न कि हमारे बुरे विचारों को।सज्जन व्यक्ति को लोग मरने के बाद भी याद रखते हैं।इसलिए शब्द गौण हैं क्योंकि वो विचारों पर निर्भर करते हैं।हमारे अच्छे विचार ही दूर तक रहते हैं और लोग न केवल उनको अपनाते हैं,बल्कि उनके कारण हमको,हमारे मरने के बाद भी याद रखते हैं।

सही काम करें।यह कुछ लोगों को कृतार्थ और बाकियों को विस्मित कर देगा।-मार्क ट्वेन

अर्थात् परोपकार करें,औरों की मदद करें,अच्छे और सच्चे विचार रखें और चरित्रवान रहें।कभी,न किसी के लिए बुरा सोचें और न किसी का बुरा करें।यही सही काम हैं।जब हम दूसरों की मदद करेंगे,उनके अच्छे-बुरे में काम आयेंगे तो जरूरतमंद व्यक्ति हमारे लिए आदर और सम्मान का भाव रखेगा और कृतार्थ हो जाएगा।वहीँ कुछ व्यक्ति हमारी सद्चरित्रता से विस्मित हो कर वैसा ही बनने की सोचेंगे और हो सकता है वे भी अच्छे काम करने लगें।

लत हर रूप में बुरी है,चाहे वह मादक,शराब हो,अफीम हो अथवा आदर्शवाद हो।-कार्ल जंग

अर्थात् जिस प्रकार अगर थोड़ी सी मात्र में ली जाए तो शराब और अफीम दवाई का काम कर सकती है किन्तु अधिक मात्रा में ली जाए अर्थात् उस की लत लगा ली जाये तो जानलेवा भी हो सकती है,उसी प्रकार जरूरत से ज्यादा आदर्शवाद भी व्यक्ति को परेशानी में डाल सकता है।व्यक्ति को अपनी अच्छाई और सद्गुणों को बरकरार रखते हुए समय के मुताबिक़ व्यवहार करना चाहिए न कि आदर्शवाद को ही पकड़ कर बैठे रहना चाहिए।

एक मूर्ख खुद को बुद्धिमान समझता है,लेकिन एक बुद्धिमान व्यक्ति स्वयं को मूर्ख ही समझता है।-विल्लियम शेक्सपियर

अर्थात् मुर्ख व्यक्ति को आता तो कुछ नहीं है किन्तु वो अपने को परम ज्ञानी समझता है।इसी कारण वो जीवन में कुछ भी सीख नहीं पाता।क्योंकि वो सोचता है कि उसे सब कुछ आता है।वहीँ बुद्धिमान व्यक्ति जितना भी सीख ले,ज्ञान प्राप्त कर ले किन्तु वो सोचता है कि अभी भी कुछ जानना बाकी है,अभी भी कुछ सीखना बाकी है।इसलिए वो अपने को मूर्ख समझता है।कहने का अर्थ है,हम कितना भी सीख लें,कितना भी ज्ञानी हो जाएँ,हमें अभिमान नहीं करना चाहिए।