PONDERABLE:42

If you do not like something then change it. If you cannot change it then change your attitude. – Maya Angelou

Viz Occasionally there are such occasions in life when we do not like anything or an attitude. But it is not necessary that what we think is the same. Sometimes the thing we are not liking is right. And we are trying to change it in vain. But when we see the same thing from another perspective, then we can know the reality.

Sometimes we do not like any habit of a person and try to change the habit of that person. If the person thinks about his mistake and changes his habit then it is okay, otherwise there is no need to be worried because it may be possible that others find that his habit is good and only you may be wrong.

To say means before doing anything, we should take into consideration for all its aspects because it may be that there is a fault in our thinking and we need to change it and not the mentality of others.

You must evolve from inside out. Nobody can teach you, nobody can make you spiritual. There is no other teacher except your own soul. – Swami Vivekananda

VIZ Our soul is the one who explains the difference between good and bad. But for this, our soul must also be holy. When our soul is pure then we will feel the difference between good and bad. When our soul is pure then we will get filled with good values. We appear holy, not only from inside but, from outside also.

The atmosphere around us will also be filled with purity. Thus, when we evolve from inside out then we become pure and reach the refuge of that divine. Therefore, only develop your soul. When the soul develops, only then will we be able to reach the summit of spirituality.

The more difficult the struggle is, the better the victory will be. -Thomas Pane

VIZ The more, a person do the hard work, the more he gets the reward. Whatever is found easily, it is not enjoyable to consume it, which comes after achieving the consumption or goal of the object received after a lot of struggle.

When we work hard in achieving our goal and face difficulties in the way, then as a result the success so achieved looks very pleasurable and sweet.

People in comparison to easy success also give more importance to the success achieved after hard struggle, and do praise of the person who has succeeded after such a difficult struggle and thus became famous in the society. Such Success is fantastic.

One of the biggest discoveries i.e. one of his great wonders, which, a person, searches for, is to know that he can do that, about which he was afraid that he cannot do it. -Henry Ford

VIZ There is no work in the whole world that cannot be done by nobody. Every task is possible if we want. Some of us are always afraid and think that the work will not completed by me.

Because of this fear, person cannot be able to find the hidden talent inside and cannot move forward. But whenever a person courageously think that he can do it and tries to do that task, he finds that he does that work so easily. And he was scared in vain.

Then it is a great surprise for him that even though being talent, he feared doing any work in vain and therefore was not able to move forward. Therefore, we must always have faith in ourselves so that we can grow in life.

Nobody can save us, except our own. Nobody can do it and probably nobody will. We must walk on this path ourselves. -Buddha

VIZ Lord Buddha says that on the path of salvation we must walk on our own. Our future is in our own hands. Every human being is responsible for his own deeds and his qualities-sins.

If we are full of virtues and are walking on the path of virtuous deeds then we will be saved from the bonds of life cycle and will attain moksha. Because of these actions, only we will get salvation and not others. Similarly, if any other is Gentleman and we are walking on the path of sin, then because of his gentleness, we will not become the recipient of salvation, because he is doing the good deeds whereas we are on the path of sin.

God means by saying this is that we should always do good deeds and be filled with virtues so that we can attain moksha by going out of the maze of life.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

 विचारणीय:४२

यदि आप कुछ पसंद नहीं करते हैं तो उसे बदल दें।अगर आप इसे बदल नहीं सकते हैं तो अपना रवैया बदल दें।-माया एंजेलओऊ

अर्थात् कभी-कभी जीवन में ऐसे अवसर आते हैं जब कोई बात या कोई रवैया हमें पसंद नहीं आता।पर जरूरी नहीं है कि जैसा हम सोचते हैं वैसा ही हो।कभी-कभी जिस बात को हम पसंद नहीं कर रहे होते वास्तव में वो सही होती है और हम व्यर्थ में ही उसे बदलने की कोशिश कर रहे होते हैं।पर जब हम उसी बात को दूसरे नजरिये से देखते हैं तो असलियत जान जाते हैं।

कभी –कभी हम किसी व्यक्ति की किसी आदत को पसंद नहीं करते और उस व्यक्ति की आदत को बदलने की कोशिश करते हैं।अगर व्यक्ति अपनी गलती समझ कर अपनी वो आदत बदल ले तो ठीक है वर्ना परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि हो सकता है उस व्यक्ति को और अन्यों को उसकी वो आदत अच्छी लगती हो और केवल आप ही गलत हों।

कहने का अर्थ है कुछ भी करने से पहले सब पहलुओं पर विचार कर लेना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि हमारी सोच में ही खराबी हो और हमें उसे ही बदलने की  आवश्यकता हो न कि अन्य को बदलने की।

आपको अन्दर से बाहर विकसित होना होगा।कोई भी आपको सिखा नहीं सकता,कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता।कोई भी अन्य शिक्षक नहीं है सिवाय आपकी अपनी आत्मा के।-स्वामी विवेकानंद

अर्थात् हमारी आत्मा ही है जो हमें अच्छे और बुरे का भेद समझाती है।पर इस के लिए हमारी आत्मा को भी पवित्र होना होगा।जब हमारी आत्मा पवित्र होगी तभी हमें अच्छे और बुरे में फर्क महसूस होगा।जब हमारी आत्मा पवित्र होगी तो हम अच्छे भावों से भर उठेंगे और न केवल भीतर से अपितु बाहर से भी पवित्र नजर आने लगेंगे।

हमारा आस-पास का वातावरण भी पवित्रता से भर जाएगा।इस प्रकार जब हम अन्दर से बाहर की और विकसित होते हैं तब हम दिव्य हो जाते हैं और उस परमात्मा की शरण में पहुँच जाते हैं।इसलिए केवल अपनी आत्मा को विकसित करो।जब आत्मा विकसित होगी तब ही हम आध्यात्मिकता के शिखर तक पहुँच पायेंगे।

जितना ज्यादा कठिन संघर्ष होगा उतनी ही अधिक शानदार जीत होगी।-थॉमस पैने

अर्थात् जितना ज्यादा व्यक्ति परिश्रम करता है उतना ही ज्यादा उसका फल मिलता है।जो वस्तु आसानी से मिल जाए उसका उपभोग करने में वो मजा नहीं आता जो मजा काफी संघर्ष के बाद प्राप्त वस्तु के उपभोग या लक्ष्य प्राप्त करने में आता है।

जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में कड़ी मेहनत करते हैं और राह में आने वाली कठिनाइयों का डट कर सामना करते हैं तब उसके परिणाम स्वरुप मिलने वाली सफलता बड़ी ही सुखदायी और मधुर लगती है।

लोग भी आसानी से मिलने वाली सफलता की अपेक्षा कठिन संघर्ष के बाद मिलने वाली सफलता को ज्यादा महत्व देते हैं और उस व्यक्ति की तारीफों के पुल बाँध देते हैं जिसको ऐसी कठिन संघर्ष के बाद सफलता मिली हो और इस प्रकार समाज में प्रसिद्ध हो कर व्यक्ति की सफलता शानदार हो जाती है।

सबसे बड़ी खोजों में से एक जो कोई व्यक्ति खोजता है,उसके महान आश्चर्यों में से एक,ये खोजना है कि वो,वो कर सकता है,जिसके बारे में वो डरता था कि वो नहीं कर सकता।-हेनरी फोर्ड

अर्थात् समस्त संसार में कोई भी कार्य ऐसा नहीं है जिसे कि कोई कर न सके।प्रत्येक कार्य संभव है यदि हम चाहें।अक्सर हम में से कुछ हमेशा डरते रहते हैं और सोचते हैं कि फलां कार्य मुझ से नहीं हो सकेगा।

इसी डर के कारण व्यक्ति अपने अन्दर छुपी प्रतिभा को नहीं खोज पाता और आगे नहीं बढ़ पाता।पर जब कभी व्यक्ति साहस कर उस कार्य को करने की कोशिश करता है जिसके बारे में सोचता था कि वो नहीं कर सकता,वो पाता है कि वो कार्य तो सुगमता से हो गया है।वो तो व्यर्थ ही डर रहा था।

तब उसे बड़ा आश्चर्य होता है कि देखो प्रतिभा होते हुए भी मैं व्यर्थ ही किसी काम को करने से डर रहा था और इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था।इसलिए हमेशा अपने ऊपर विश्वास बनाए रखना चाहिए ताकि जीवन में हम तरक्की कर सकें।

कोई भी हमें बचा नहीं सकता सिवाय हमारे स्वयं के।कोई भी इसे नहीं कर सकता और शायद कोई भी नहीं।हमें स्वयं ही इस राह पर चलना होगा।-बुद्धा

अर्थात् भगवान् बुद्ध कहते हैं कि मोक्ष प्राप्ति के रास्ते पर हमें स्वयं ही चलना होगा।हमारा भविष्य हमारे ही हाथ में होता है।प्रत्येक मनुष्य अपने किये हुए कर्मों और अपने गुणों –अवगुणों के लिए स्वयं ही जिम्मेदार होता है।

यदि हम सद्गुणों से भरे हैं और सत्कर्मों की राह पर चल रहे हैं तो हम जीवन चक्र के बंधनों से बचे रहेंगे और मोक्ष को प्राप्त होंगे।अपने इन कर्मों के कारण केवल हम ही मोक्ष के अधिकारी होंगे न कि अन्य।इसी प्रकार यदि कोई अन्य सज्जन है और हम पाप के रास्ते पर चल रहे हैं तो उस की सज्जनता के कारण हम मोक्ष के अधिकारी नहीं हो जायेंगे क्योंकि सद्कर्म तो वो कर रहा है,हम तो पाप की राह पर हैं।

भगवान् के कहने का अर्थ है सदा सद्कर्म करो और सद्गुणों से भरे रहो ताकि आप जीवन की भूल भुलैया से निकल कर मोक्ष को प्राप्त हो सकें।