PONDERABLE:44-CHARACTER

A person with a weaker character, despite having resourceful, cannot hold some respect in the society. -Mahatma Gandhi

VIZ Though people think that nowadays the respect of a person in the society is due to his resources, but it is not so in reality. People can suppress due to the wealth of wealthy people, but they cannot give them true respect, if they are of weak character.

If a wealthy person is not of good character then people will see him with a despise vision. He will not say anything to him in front of him but will do his evil behind him, that is, they will never respect him from inside. Whether anybody may be poor, but if he is of good character, so he gets respect in the whole world. That’s why a person should keep his character good.

Like the behavior of others which we don’t like, we should not behave same, towards others. – Confucius

VIZ When a person does not like any conduct done by others, then how can he expect that the same kind of conduct that he has done will be liked by that person.

When someone gives someone bitter fruit to eat, then in return, he will only get bitter fruit. means, if one behaves badly with someone, then he will also have to suffer the bad conduct of that person, which he will not like. Therefore, if a person does not like conduct like this, then the same behavior should not be done with the other person.

The character we create will remain with us in the future as long as we do not get absorbed in God by meeting with God. -Dr. Radhakrishnan

VIZ The character we create will go with us till our death. Money will not remain always. Today we have money, tomorrow it will leave us. But the character is such a thing that will remain with us even after our death.

If we will keep bad character, then we will accumulate misconduct. And by taking the burden of such misconducts, how can a person face God? That is why we should create a true character so that by realization of God we can be absorbed in him.

Whatever we have stored in our character, we will take with us. -Humboldt

VIZ After our death, only our karmas go with us. As well as our sins and virtues also go with us. Person always runs away behind the money and for it do all types of wrong works. But the money stays here and never goes with us.

According to our deeds and our properties, we get justice in God’s place. When we must leave everything here, then why not we should store virtues? We should live life by performing good karmas because only our good karmas and virtues will go with us everywhere.

Character is power. Knowledge makes the person’s character more better. -Satya sai Baba

VIZ The person’s character is his biggest power. If the person’s character is weak then he will not be able to live happily in this life, but he will not get peace even after posthumous also.

The person who is of good character, can do anything. Other people do not get tired of praising his character and are ready to do everything for him.

When a person gets this knowledge that what is good and what is bad, then he takes away the evil character and adopt good character. Therefore, it has been said that knowledge makes the person’s character better.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

विचारणीय:४४ चरित्र

दुर्बल चरित्र वाला व्यक्ति साधन संपन्न होने पर भी समाज में दो कौड़ी की इज्जत नहीं रख पाता।-महात्मा गांधी

अर्थात् हालांकि लोग सोचते हैं कि आजकल व्यक्ति की समाज में इज्जत उसके साधन संपन्न होने से है,वास्तव में ऐसा नहीं है।लोग साधन संपन्न व्यक्ति के पैसे के रौब में दब तो सकते हैं पर उसे सच्ची इज्जत नहीं दे सकते,यदि वो दुर्बल चरित्र का है।

यदि साधन संपन्न व्यक्ति अच्छे चरित्र का नहीं है तो लोग उसे हेय दृष्टि से देखेंगे।चाहे वो उसके सामने कुछ न कहें पर उसके पीछे उसकी बुराई करेंगे अर्थात् उसे मन से इज्जत कभी नहीं देंगे।व्यक्ति चाहे गरीब ही क्यों न हो अगर चरित्रवान है तो वो सम्पूर्ण संसार में इज्जत पाता है।इसलिए व्यक्ति को अपना चरित्र उत्तम रखना चाहिए।

दूसरों का जो आचरण तुम्हें पसंद नहीं,दूसरों के प्रति वैसा आचरण कभी मत करो।-कन्फ्यूशियस

अर्थात् जब व्यक्ति स्वयं दूसरों के द्वारा किये गए किसी आचरण को पसंद नहीं करता तो वो ये कैसे आशा रख सकता है कि उसके द्वारा किया गया समान आचरण उस व्यक्ति को पसंद आएगा।

जब कोई किसी को कडवा फल खाने को देगा तो बदले में उसे कडवा फल ही मिलेगा।अर्थात् यदि कोई किसी के साथ बुरा आचरण करेगा तब उसे भी उस व्यक्ति के बुरे आचरण को झेलना पड़ेगा,जो कि उसको पसंद नहीं आएगा।इसलिए जैसे आचरण को कोई व्यक्ति पसंद नहीं करता वैसा आचरण उस व्यक्ति को दूसरों के साथ भी नहीं करना चाहिए।

हम जिस चरित्र का निर्माण करते हैं,वह हमारे साथ भविष्य में भी रहेगा,जब तक कि हम ईश्वर का साक्षात्कार कर उसमें लीन नहीं हो जाते।-डॉ राधाकृष्णन

अर्थात् जैसा चरित्र हम निर्माण करते हैं वैसा ही हमारे साथ हमारे मरने पर्यंत जाएगा।रुपया पैसा तो आनी- जानी चीज है।आज हमारे पास पैसा है कल नहीं रहेगा।पर चरित्र ऐसी चीज है जो हमारे मरने के बाद भी हमारे साथ ही रहेगी।

अगर हम दुश्चरित्र रखेंगे तो दुष्कर्मों को ही संचित करेंगे।और ऐसे दुष्कर्मों का बोझ ले कर व्यक्ति भगवान् का सामना कैसे कर पायेगा।इसलिए हमें सत्चरित्र का निर्माण करना चाहिए ताकि हम ईश्वर का साक्षात्कार कर उस में लीन हो सकें।

जो कुछ हमने चरित्र में संचित किया है,वह हम अपने साथ ले जायेंगे।-हेम्बोल्ट

अर्थात् हमारे मरने के बाद हमारे साथ केवल हमारे द्वारा किये गए कर्मफल ही जाते हैं।साथ ही साथ हमारे दुर्गुण और सद्गुण भी हमारे साथ जाते हैं।व्यक्ति उम्र भर रूपये पैसे के पीछे भागता रहता है और उसके लिए उलटे सीधे काम करता रहता है पर ये रुपया पैसा यहीं धरा रह जाता है।

हमारे द्वारा किये गए कर्मों और हमारे गुणों के अनुसार ही हमें भगवान् के यहाँ इन्साफ मिलता है।जब सब कुछ यहीं रह जाना है तो क्यों न सद्गुणों का संचय करें और सद्कर्म करते हुए जीवन व्यतीत करें क्योंकि ये ही हमारे साथ जायेंगे।

चरित्र शक्ति है।ज्ञान व्यक्ति के चरित्र को और अच्छा बनाता है।-सत्यसांई बाबा

अर्थात् व्यक्ति का चरित्र ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है।यदि व्यक्ति का चरित्र दुर्बल है तो वो न तो इस जीवन में ही खुश रह पायेगा अपितु मरणोपरांत भी उसे शान्ति नहीं मिलेगी।

जो व्यक्ति चरित्रवान है वो क्या कुछ नहीं कर सकता।अन्य भी उसके चरित्र की सराहना करते नहीं थकते और उसके लिए सब कुछ करने को तैयार रहते हैं।

वहीँ जब व्यक्ति को ये ज्ञान हो जाता है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा तो वो दुश्चरित्र को त्याग कर सद्चरित्र को अपना लेता है।इसलिए कहा गया है कि ज्ञान व्यक्ति के चरित्र को और अच्छा बनाता है।