PONDERABLE:45-ANGER

Anger, produces foolishness. In foolishness, memory becomes confused, when memory becomes confused, intellect gets destroyed and when intellect gets destroyed, the person himself be destroyed. – Shrimad Bhagwat Geeta

VIZ When a person becomes angry, his focus is only on humiliating & destroying the other person. In this way, he loses his ability to think and understand and starts behaving like a fool. Thus, by losing his intellect, he does his own loss.

Anger, makes his body weak and as well as, being not able to see his work, he also causes his own economic losses. From an angry person, even such people also wants to stay away, on whom, he is not angry. Hence, we should never get angry.

An angry man, does not know what is expressible to say and what not. For him everything can be expressed and every work can be done. -Maharshi Valmiki

VIZ An angry person, becomes like a fool, who does not know, what is right and what is wrong. Due to this, he also speaks things that he should not speak. He also uses abusive language. In his anger, he adopts all those methods which are wrong to do. In this way, the person who has lost the understanding of good & bad destroys himself. That’s why never do anger.

The person who takes his anger on himself, can save others from anger. Only he can make his life happy. – Socrates

VIZ Just as, when ghee is poured into fire, fire becomes fierce, in the same way anger increase more anger. When we are angry with someone, we use abusive language for him. In reverse, the person, who is in front of us, also become angry on us and uses abusive language for us. If we take control on our anger, that means, absorb it inside ourselves, then the person will not have the opportunity to get angry in reply. When our anger will disappear from within us, we will be able to experience the joys of life.

Only the fool gets angry, not the enlightened ones. -Vishnu Purana

VIZ The one who is enlightened, is aware of the loss of anger and knows that anger will eventually hurt him, and not hurt the one, on whom he is angry. He knows that anger will take away all his happiness and not only will bring economic harm to him, but also narrow down, his social circle. Only fools and blockheads, who do not know all this, are victims of anger.

People often complete the lack of logic with anger, which is not a good thing. -R. Elgart

VIZ Whenever the person wants to enforce his sayings or when no one is endorsing his saying, and he does not have any reasoning to prove his point, then he often gets angry and speaks in a loud voice and tries to convince others. It is not right, because such behavior gives birth to differences and not only increase the bitterness among the people, but the person behaving like this can also become the character of ridicule.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

विचारणीय:४५

क्रोध में मूढ़ता उत्पन्न होती है,मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है,स्मृति भ्रांत होने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।-श्रीमद्भागवत् गीता

अर्थात् जब व्यक्ति क्रोधित होता है तो उसका ध्यान केवल दूसरे को अपमानित करने और उसका नुक्सान कर पाने पर ही केन्द्रित रहता है।ऐसे में वह अपनी सोचने समझने की शक्ति खो देता है और वह मूर्खों की भांति व्यवहार करने लगता है।इस प्रकार अपना विवेक खो कर वह अपना ही नुक्सान कर लेता है।क्रोध उसके शरीर को दुर्बल बना देता है और साथ ही साथ अपने काम पर नजर न होने के कारण वह अपना आर्थिक नुक्सान भी कर लेता है।क्रोधित व्यक्ति से ऐसे लोग भी दूर रहना चाहते हैं जिनके प्रति वह क्रोध नहीं कर रहा होता।अत: कभी क्रोध नहीं करना चाहिए।

क्रोधित मानव नहीं जानता कि क्या कथनीय है और क्या अकथनीय,क्रोधी के लिए कुछ भी अकार्य नहीं और न कुछ अकथनीय है।–महर्षि बाल्मीकि

अर्थात् क्रोधित व्यक्ति मूढ़ की भांति हो जाता है जिसे पता नहीं होता कि क्या सही है और क्या गलत।ऐसे में वह ऐसी बातें भी कह देता है जो उसे नहीं कहनी चाहियें थीं।वो अपशब्दों का भी इस्तेमाल करता है।क्रोधावस्था में वह बदला लेने के लिए करने योग्य और न करने योग्य सभी तरीके अपनाता है।इस प्रकार भले बुरे की समझ खोया हुआ व्यक्ति खुद को ही नष्ट कर लेता है।अत: कभी क्रोध नहीं करना चाहिए।

जो मानव अपने क्रोध को अपने ऊपर ही ले लेता है,वही दूसरों को क्रोध से बचा सकता है।वही अपने जीवन को सुखी बना सकता है।–सुकरात

अर्थात् जिस प्रकार आग में घी डालने से आग और प्रज्वलित हो जाती है उसी प्रकार क्रोध–क्रोध को और बढ़ाता है।जब हम किसी के ऊपर क्रोधित होते हैं तो उसे अपशब्द कहते हैं।बदले में सामने वाला व्यक्ति भी हम पर क्रोधित हो कर हमें उल्टा-सीधा कहता है।पर यदि हम अपने क्रोध को अपने ऊपर ले लें अर्थात् काबू में कर लें,उसे पी जाएँ तो सामने वाले को प्रत्युत्तर में क्रोधित होने का अवसर ही नहीं मिलेगा।जब हमारे अन्दर से क्रोध चला जाएगा तो हम भी जीवन में सुख का अनुभव कर सकेंगे।

मूर्खों को ही क्रोध आता है,ज्ञानियों को नहीं।–विष्णु पुराण

अर्थात् जो ज्ञानी है वो क्रोध के नुक्सान जानता है और जानता है कि अंततः क्रोध उसे ही नुक्सान पहुंचाएगा न कि उसको जिसके ऊपर वो क्रोध कर रहा है।वो जानता है कि क्रोध उसके सुख-चैन को छीन लेगा और न केवल उसे आर्थिक नुक्सान पहुंचाएगा अपितु उसका सामाजिक दायरा भी संकुचित कर देगा।केवल मूढ़ और मूर्ख ही जो ये सब नहीं जानते क्रोध के शिकार होते हैं।

तर्क की कमी को लोग अक्सर क्रोध से पूरा करते हैं,जो अच्छी बात नहीं है।-आर० एलगट

अर्थात् जब कभी व्यक्ति को अपनी कोई बात मनवानी हो या जब उसकी बात कोई मान न रहा हो और उसके पास अपनी बात को सिद्ध करने का कोई तर्क न हो तो वो अक्सर क्रोधित हो कर,ऊंची आवाज में बोल कर अपनी बात को मनवाने की कोशिश करता है।पर ये सही नहीं है क्योंकि इस तरह का व्यवहार तल्खी को ही जनम देता है और न केवल व्यक्तियों में आपस में कटुता बढ़ जाती है,बल्कि ऐसा व्यवहार करने वाला व्यक्ति उपहास का पात्र भी बन सकता है।