PONDERABLE:47 – HAPPINESS, REJOICE

The way to be happy in the world is to reduce our needs. -Mahatma Gandhi

VIZ The person should limit his needs. There are many things in the world without which the work can be done but the person continues to run his desire to get them and he could not enjoy what he has received. If the person understands it and reduce the necessities, i.e. restrict it to the extent of importance, then there is no reason why the person will not be happy in this world.

The happiness which we earn only for ourselves, we finally get tired of them. -Peterson

VIZ When a person thinks only about himself and only collects things of happiness for himself, then one time comes when he fails to find happiness in them. Any happiness cannot remain forever with us, until, the other share it with us.

And only those pleasures can be shared, which is not for us but for all. And only those joys can be shared which are not meant for themselves but for everyone. The way, that by eating a similar meal every day, the taste of it stops coming, in the same way, the person enjoys his happiness only for a time. Then a time comes, when he gets bored of it. Therefore, we should search such happiness that can give happiness to all.

The kind heart is the fountain of happiness. He, by filling all the things with smiles, makes everything around him fresh. – Ewing

VIZ When a person’s heart is kind, then he does not back away from helping others, in their afflictions and sufferings. Thus, he brings out the poor and the afflicted, from problems and brings a smile on their faces. Just like the way, the fountain of water, not only soak itself, but humidify all the people around him, the same way, the fountain of kindness spreads happiness and smiles, in which, not only a person but all the people around him, finds themselves soaked.

From the path of restraint and sacrifice, happiness and peace can be reached. -Einstein

VIZ The person who is not contented and run behind the desire, and the person who does not give up his possessions, i.e., does not give it to the needy, he can never attain peace, because, being dissatisfied, he always runs for more and always remain uneasy. Due to lack of sacrifice to help the needy, he does not even get that happiness, which he may achieve by giving help to needy and after seeing the smile that comes in their faces. That is why follow the path of restraint and sacrifice so that you achieve happiness and peace.

Happiness and bliss are such perfumes, the more you will sprinkle, the more fragrances you will absorb in. – Sharath Chandra

VIZ Just like, the more sprinkling of the perfume, the more of its fragrance spreads, and not only does it fragrant the person who sprinkles but also the others, in the same way, how much pleasure and bliss, the person will provide to others, the same amount of happiness and peace he will feel within himself. The pleasure and bliss, which a person achieve by helping and providing smile on the faces of needy, is always remain with the person and the person feels himself immersed in its fragrance.

HINDI TRANSLATION: हिंदी अनुवाद

विचारणीय:४७ ख़ुशी ,प्रसन्नता

संसार में प्रसन्न रहने का उपाय यह है कि अपनी जरूरतें कम करो।-महात्मा गांधी

अर्थात् व्यक्ति को अपनी जरूरतों को सीमित करना चाहिए।संसार में अनेकों वस्तुएँ ऐसी हैं जिनके बिना काम चल सकता है पर व्यक्ति उनको पाने की इच्छा लिए भागता रहता है और जो कुछ उसको प्राप्त है उसका आनंद नहीं उठा पाता।यदि व्यक्ति ये समझ जाए और अपनी जरूरतें कम कर दे अर्थात् वहाँ तक सीमित रखे जहां तक जरूरी है तो कोई कारण नहीं है कि व्यक्ति इस संसार में प्रसन्न न रह पाए।

जो खुशियाँ हम सिर्फ अपने लिए हासिल करते हैं,उनसे आख़िरकार हम उकता ही जाते हैं।–पीटरसन

अर्थात् जब व्यक्ति केवल अपने बारे में ही सोचता है और केवल अपने लिए ही खुशियों का सामान जुटाता है तो एक समय ऐसा आता है जब वो उनमें ख़ुशी ढूँढने में असफल हो जाता है।कोई भी ख़ुशी तब तक ही चिरस्थाई रह सकती है जब तक अन्य उसे हमारे साथ सांझा करें।

और केवल ऐसी खुशियाँ ही सांझा की जा सकती हैं जो केवल अपने लिए न हो कर सबके लिए हों।जिस प्रकार एक सा ही खाना रोज-रोज खाने से उसका स्वाद आना बंद हो जाता है,उसी प्रकार व्यक्ति अपनी ख़ुशी का आनंद केवल एक समय तक ही ले सकता है।एक समय ऐसा आता है जब वो उकता जाता है।इसलिए ऐसी खुशियों की तलाश करनी चाहिए जो सबको ख़ुशी दे सकें।

दयालु हृदय प्रसन्नता का फव्वारा है।वह अपने पास की प्रत्येक वस्तु को मुस्कानों से भरकर ताजा बना देता है।-इविंग

अर्थात् जब व्यक्ति का हृदय दयालु होता है तो वो अन्यों के दुःख में,उनकी परेशानियों में उनकी सहायता करने से पीछे नहीं हटता।इस प्रकार वह दीन-दुखियों को परेशानियों से निकाल कर उनके चेहरे पर मुस्कान ला देता है।जिस प्रकार पानी का फ़व्वारा न केवल खुद को अपितु अपने आस पास के सभी व्यक्तियों को भिगो डालता है,उसी प्रकार दयालुता का फ़व्वारा प्रसन्नता और मुस्कान की ऐसी फुहार लगाता है जिसमें व्यक्ति न केवल खुद को अपितु अपने आस-पास के सभी व्यक्तियों को भीगा हुआ पाता है।

संयम और त्याग के रास्ते से ही आनंद और शान्ति तक पहुँचा जा सकता है।–आइन्स्टीन

अर्थात् जो व्यक्ति संयमित नहीं है और इच्छा के पीछे भागता रहता है और जो व्यक्ति अपने पास की वस्तुओं का त्याग नहीं करता अर्थात् जरूरतमंदों में नहीं बांटता वह कभी भी शान्ति को प्राप्त नहीं कर सकता क्योंकि असंतुष्ट होने के कारण वह हमेशा ९९ के चक्कर में पड़ा रहता है और अशांत रहता है।त्याग द्वारा जरूरतमंदों की मदद न करने के कारण उसे उस आनंद की भी प्राप्ति नहीं होती जो जरूरतमंदों की मदद कर उनके चेहरे पर आई मुस्कान को देख कर मिलता है।इसलिए कहा है कि संयम और त्याग का मार्ग अपनाओ ताकि आपको आनंद और शान्ति की प्राप्ति हो।

सुख और आनंद ऐसे इत्र हैं,जिन्हें जितना छिडकोगे उतनी ही अधिक सुगंध आपके अन्दर समाएगी।-शरतचन्द्र

अर्थात् जिस प्रकार इत्र को जितना ज्यादा छिड़कते हैं ,उतनी ही ज्यादा उसकी सुगंध फैलती जाती है और वो न केवल अन्यों को बल्कि इत्र छिडकने वाले को भी सुगन्धित कर देती है,उसी प्रकार जितना सुख और आनंद व्यक्ति दूसरों को पहुंचाएगा,उतना ही सुख और शान्ति स्वयं के भीतर भी पायेगा।जो सुख और आनंद जरूरतमंदों की मदद कर के और उनके चेहरे पर मुस्कान ला कर मिलता है,वो हमेशा व्यक्ति के साथ रहता है और व्यक्ति उसकी सुगंध में खुद को डूबा हुआ महसूस करता है।