PONDERABLE:48 -Fault/Blame –Blameworthy

विचारणीय: ४८-दोष-दोषी

When we pay attention to the frailty of the other, we ourselves, try to show very good. However, when we pay attention to our faults, then we will find ourselves crooked and destitute – Mahatma Gandhi

VIZ when we blame others, we think that the blame is not within us. Our focus is not going on this that we can have the similar frailty in us, which we are finding out in the others. However, if   we will see to ourselves then we will find that we are also home of various defects .We also do, all kinds of similar bad karmas, the same bad karmas, for whom we give advices to others.it means ,that we should see our faults and try to correct them, and should not try to show others their faults. .When each person try to know his own fault and try to rectify and remove his own faults then there will be no place for any flaws.

दूसरे के दोष पर ध्यान देते समय हम स्वयं बहुत भले बन जाते हैं।परन्तु जब हम अपने दोषों पर ध्यान देंगे,तो अपने आपको कुटिल और कामी पायेंगे।महात्मा गांधी

अर्थात् जब हम दूसरे में दोष निकालते हैं तो सोचते हैं कि वो दोष हमारे अन्दर नहीं है।हमारा ध्यान इस और जाता ही नहीं है कि हमारे अन्दर भी वही दोष हो सकते हैं जो हम दूसरे में निकाल रहे हैं।पर जब हम खुद की ओर देखेंगे तो पायेंगे कि हम भी विभिन्न दोषों का घर हैं।हम भी सभी प्रकार के बुरे कर्म कर रहे हैं,वही सब बुरे कर्म जिनके लिए हम दूसरों को नसीहत देते हैं।कहने का तात्पर्य है कि हमें अपने दोष देखने चाहिए और उनको दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।जब प्रत्येक व्यक्ति अपने दोषों को जानने और उनको दूर करने की कोशिश करेगा तो दोषों के लिए संसार में जगह ही नहीं बचेगी।

As long as you have a habit of seeing faults in others, then it is very difficult for you to meet God-Ramtirth

VIZ if we will continue to see the flaws in others every time and will not notice the hidden good qualities in them then how can we will become good ourselves .when, we ourselves cannot become good, then how can we meet god. With our goodness, we can become same like god. Moreover, when we will be able to see goodness in others only then we can see God within him.it means to say that we should see goodness everywhere because what we see, we get the same.

जब तक तुममें दूसरों के दोष ही दोष देखने की आदत मौजूद है,तब तक तुम्हारे लिए ईश्वर का साक्षात्कार करना अत्यंत कठिन है।रामतीर्थ

अर्थात् यदि हम हर वक्त दूसरों के दोषों को ही देखते रहेंगे और उनके भीतर छुपे अच्छे गुणों की ओर ध्यान नहीं देंगे तो हम खुद कैसे अच्छे बन पायेंगे।जब हम खुद ही अच्छे नहीं बन पायेंगे तो हमें ईश्वर का साक्षात्कार कैसे होगा।अपनी अच्छाई के द्वारा मनुष्य ही ईश्वर तुल्य हो जाता है और जब हम दूसरे में अच्छाई देख पायेंगे तो उसके भीतर ही ईश्वर के भी दर्शन कर लेंगे।कहने का अर्थ है हमें सभी और अच्छाई ही देखनी चाहिए।क्योंकि जैसा हम देखते हैं वैसा ही हम प्राप्त करते हैं।

In ninety- nine percent situations, nobody blame himself, no matter how huge is his mistake. – Del Carnegie

VIZ although the mistake is ours, but often we do not accept our mistake. Even, the mistakes made by us be imposed upon others by us. Thus, we wants to show ourselves to be clean. However, in order to rise in life, it is necessary that we should accept our mistakes and make efforts to remove them.

निन्यानवे प्रतिशत अवस्थाओं में कोई भी मनुष्य स्वयं को दोषी नहीं ठहराता,चाहे उसकी कितनी ही भारी भूल क्यों हो।डेल कारनेगी

अर्थात् चाहे गलती हमारी ही क्यूँ न हो पर अक्सर व्यक्ति अपनी गलती कभी भी नहीं मानता।अपने द्वारा की गयी गलतियां भी व्यक्ति दूसरों पर थोप देता है।इस प्रकार वो स्वयं को पाक साफ़ दिखाना चाहता है।पर जीवन में ऊपर उठने के लिए आवश्यक है कि अपनी गलतियों को स्वीकारा जाए और उनको दूर करने का प्रयास किया जाए।

Don’t do such work yourself, which you think is bad in the other person, but do not blame others. – Swami Ramatheertha

VIZ we have no right that such work, which we feel wrong, the habit, which we believe is wrong, will continue to do it ourselves, but if someone does the same, then we think him a bad guy, blame him and he has been   branded as a bad person by us. First, remove all the faults from within yourself. Whenever each person abandons all the evils from his heart instead of blaming others, then nobody will even need to understand anyone else as bad.

उस काम को,जिसे तुम दूसरे व्यक्ति में बुरा समझते हो,स्वयं त्याग दो परन्तु दूसरों पर दोष मत लगाओ।स्वामी रामतीर्थ

अर्थात् हमें कोई हक़ नहीं है कि जिस काम को हम गलत समझते हैं,जिस आदत को हम गलत मानते हैं,उसको खुद तो करते रहें,पर कोई दूसरा करे तो उसे बुरा समझें,उसे दोष दें और उसको दुर्जन मानें।हमें चाहिए इससे पहले हम खुद के भीतर से सारे अवगुणों को दूर करें।जब प्रत्येक व्यक्ति अन्यों पर दोषारोपण करने की बजाय अपने अन्दर से सरे दुर्गुणों को त्याग देगा तो किसी को भी किसी अन्य को बुरा समझने की जरूरत नहीं रहेगी।

It is difficult to find the solution of all the hidden defects-Mahatma Gandhi

VIZ as long as we will keep hiding the faults of ourselves, will not accept them or not only this, but will put the blame on someone else, then how can we find ways to improve them? When we accept our faults, then we will be able to try to improve them. So Always keep on accepting your faults and should endeavor to overcome them.

सभी छुपे हुए दोषों का उपाय ढूंढना कठिन होता है।महात्मा गांधी

अर्थात् जब तक हम स्वयं के दोषों को छुपाते रहेंगे,उनको स्वीकार नहीं करेंगे या अपने दोष किसी और के सर लगा देंगे तो हम उनको सुधारने का उपाय कैसे खोज पायेंगे।जब हम अपने दोषों को स्वीकारेंगे तभी हम उनको सुधारने का भी प्रयत्न कर पायेंगे।इसलिए सदा अपने दोषों को स्वीकार करते रहना चाहिए और उनको दूर करने का प्रयास भी करते रहना चाहिए।